ओळ्यूं पर कवितावां

स्मृति एक मानसिक क्रिया

है, जो अर्जित अनुभव को आधार बनाती है और आवश्यकतानुसार इसका पुनरुत्पादन करती है। इसे एक आदर्श पुनरावृत्ति कहा गया है। स्मृतियाँ मानव अस्मिता का आधार कही जाती हैं और नैसर्गिक रूप से हमारी अभिव्यक्तियों का अंग बनती हैं। प्रस्तुत चयन में स्मृति को विषय बनाती कविताओं को शामिल किया गया है।

कविता167

ओळूं

आईदान सिंह भाटी

बुगचौ

आईदान सिंह भाटी

दीठाव रै बेजा मांय

तेजसिंह जोधा

याद

विजय राही

थारी अर म्हारी बात

आईदान सिंह भाटी

गाजर रौ सीरो

अनिला राखेचा

नैनी कवितावां

ओंकार श्री

पैन

हरीश हैरी

गांव री कांदा-रोटी

मृदुला राजपुरोहित

ओळूं घट की कस्तूरी

प्रेमजी ‘प्रेम’

पिताजी-२

ओम पुरोहित ‘कागद’

म्हारी दीठ

अर्जुनदेव चारण

म्हारै पुराणियां घर री

मृदुला राजपुरोहित

थेवड़ां री धड़क

मनीषा आर्य सोनी

घर अर फळसौ

आईदान सिंह भाटी

ओळूं ओळावै

संदीप 'निर्भय'

याद

राजदीप सिंह इन्दा

बीजौ मारग नीं

कुमार अजय

ओळ्यूं

पवन राजपुरोहित

गांधी नै चितारतां

अर्जुनदेव चारण

थारै गयां पछै

नीरज दइया

यादगिरी

तेजस मुंगेरिया

भाव री रेत

अनीता सैनी

जूनो संगती

भगवती लाल व्यास

निरखणो

जितेन्द्र कुमार सोनी

ओळूं आसी

संदीप 'निर्भय'

कोई तौ हा

ओम पुरोहित ‘कागद’

रेत में खेलबो

अखिलेश 'अखिल'

भूख री ओळखाण

शंभुदान मेहडू

मां री ओळूं

नंद भारद्वाज

बापू

कुलदीप पारीक 'दीप'

जद म्हूँ न्हँ रहैउँगो

हेमन्त गुप्ता पंकज

बाबू सा थारा आँगणा

शकुंतला अग्रवाल 'शकुन'

ओळूं

प्रेमजी ‘प्रेम’

कवियाँ रो राजस्थान

अवन्तिका तूनवाल

क्यूं याद है?

गोरधन सिंह शेखावत

म्हारा कंवर सा

कल्याणसिंह राजावत

वाड़ जुई र्यो हूँ

महेश देव भट्ट

लड़ाई सूं पैली

अर्जुनदेव चारण

मैसेज

किरण राजपुरोहित 'नितिला'

अनंत जात्रा

कृष्ण बृहस्पति

असैंधा मिनखां री प्रीत

गीतिका पालावात कविया

फूठरापो गांव रौ

रचना शेखावत

सुगन

कृष्ण बृहस्पति

अेक पंखेरू

वासु आचार्य

थांरी ओळयूं

नरेंद्र व्यास