ओळ्यूं पर ग़ज़ल

ग़ज़ल10

मरुवो

सत्य पी. गंगानगर

याद नित आयां सरै

किशोर कल्पनाकान्त

खुसबू रळी मन-प्राण में

किशोर कल्पनाकान्त

म्हारै भावै रोटी खाव

मनोहरलाल गोयल

खूब दनां में आया जी

कृष्णा कुमारी ‘कमसिन’

हूँ थारी याद लियां बैठ्यो हूँ

लक्ष्मीनारायण रंगा

चंदणिया खसबू

मालचन्द्र ‘कमल’

लोग घणां ई घूमबा-फरबा जावै छै

कृष्णा कुमारी ‘कमसिन’