ढोला मारू
सपनो तो आयो अर परो गियो पण मारवण री आंख्यां में पाछी नींद नीं आई। आंख्यां खोलै तो बारै अंधारो-अंधारो लागै अर मींचै तो अन्तस में घोर अंधारो। उठै, बैठै अर पाछी सोवै पण जीव ने जक नीं। गांव रै बारै ताल में कुरजां कुरळायी।
घर में सूती कुरजां रा बच्चा री सी