आगै आगै रैण, सिंझ्या रा होट रंगीज्या,

इमरत ज्यूं मीठी ओळूं. सूं नैण भरीज्या।

टुगमुग जावै चांदड़लौ तारा बिलमावै,

डेडर टर-टर करै, मोरिया मीठा गावै,

मस्त व्हियोड़ी रमै चांदणी आंख मिचूंणी,

ढळती जावै रैण, धड़ू कै सांसां दूणी,

चटखा देवै चोर हवा रा तिणखा तीख्या,

झरझरती मीठी ओळूं सूं नैण भरीज्या।

बाजै फेरूं बीण आज सागै सुरसाळो,

रिमझिम रिमझिम नाचै है छांटाँ मतवाळो,

धड़कण देवै ठेकौ बिन बूझयां माडांणी,

भूल्यौ चूक्यौ जावै कोई साचांणो,

फीकौ सावण मास, सुपनियां कांटा उळझया,

कूड़ौ बिसवास लियां दो नैण भरीज्या।

आस मिलण री नांव, उमर रौ ओछौ पांणी,

सूनी म्हारी कूंख बलै, काया अधरांणी,

कटगी ऊमर डोर अधूरी रैगी बातां,

ओळूं रै पसवाड़ै ढळगी, पाकी रातां,

कदै पूरो आस, हठीला बालम रीस्या,

अन्त समै री आस लियां दो नैण भरीज्या।

स्रोत
  • पोथी : हंस करै निगराणी ,
  • सिरजक : सत्येन जोशी ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी
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