कुदरत पर कवितावां

प्रकृति-चित्रण काव्य

की मूल प्रवृत्तियों में से एक रही है। काव्य में आलंबन, उद्दीपन, उपमान, पृष्ठभूमि, प्रतीक, अलंकार, उपदेश, दूती, बिंब-प्रतिबिंब, मानवीकरण, रहस्य, मानवीय भावनाओं का आरोपण आदि कई प्रकार से प्रकृति-वर्णन सजीव होता रहा है। इस चयन में प्रस्तुत है—प्रकृति विषयक कविताओं का एक विशिष्ट संकलन।

कविता161

प्रेम री परीभाषा

सत्येंद्र चारण

परेम

अंजु कल्याणवत

डांडी रौ उथळाव

तेजस मुंगेरिया

अेकला बळै

आशीष बिहानी

अै कठफोड़ा

शिवराज छंगाणी

ध्वनि परस

रामस्वरूप किसान

ठूंठ

गजेसिंह राजपुरोहित

काळ

कन्हैयालाल सेठिया

टीब्बा

अंजु कल्याणवत

सौरम रो भभको

रामस्वरूप किसान

नंग धड़ंग अरावळी

कन्हैयालाल सेठिया

धरती'र भासा!

कन्हैयालाल सेठिया

म्हारौ गांव

हरमन चौहान

अंतस् मीठास

शिवराज छंगाणी

भानमती रो पीटारो

दीनदयाल ‘कुन्दन’

जोवो तो सरी

पुरुषोत्तम छंगाणी

हे! कुनामी, कुकर्‌मी-सुनामी

तारालक्ष्मण गहलोत

गीतां को गेलो

प्रेमजी ‘प्रेम’

ओंटी खेजड़ी

गुलाब चंद कोटड़िया

माया री सिस्टी

सत्यनारायण इन्दौरिया

वाह भई शेखावाटी

मुरली बासोतिया

फरक दीठ रो

मदन गोपाल लढ़ा

पसु

रामस्वरूप किसान

ओळमो

ओम नागर

अस्यौ छै म्हांको गांव

दिलीप सिंह ‘हरप्रीत’

पान-फूल

प्रमिला शंकर

मीठी तान

धनंजया अमरावत

अंधारै रो रळकतौ डबको!

पुरुषोत्तम छंगाणी

थूर

शैलेन्द्र उपाध्याय

तीन मुक्तक

कल्याणसिंह राजावत

जद हरी करै

सांवर दइया

हंस अर कोचरी

मनोहर शर्मा

तपती धरती

जगदीशसिंह सीसोदिया ‘स्नेही’

कोटो टोकियो हो ग्यो

दिलीप सिंह ‘हरप्रीत’

मौसम

गोरधन सिंह शेखावत

चन्द्र संदेश

नृसिंह राजपुरोहित

बम फाटै

यादवेन्द्र शर्मा 'चन्द्र'

माटी री सौरम

इरशाद अज़ीज़

काल

नागराज शर्मा

बीड़ी पीवै बावळा

केशव पथिक आचार्य

आपौ अर औकात

शंकरसिंह राजपुरोहित

संजीवणी आस

दीनदयाल ओझा

पांचूं घी में

सत्यनारायण इन्दौरिया

सूखा रूंख : गीला बोल

कल्याणसिंह राजावत

अेक पानू फैरू खरीग्यू

भविष्यदत्त ‘भविष्य’

रोहिड़ै रौ फूल

शिवराज छंगाणी

रेत में मधुमास

इन्द्र प्रकाश श्रीमाली

किरड़कांटियो

कन्हैयालाल सेठिया