कुदरत पर कवितावां

प्रकृति-चित्रण काव्य

की मूल प्रवृत्तियों में से एक रही है। काव्य में आलंबन, उद्दीपन, उपमान, पृष्ठभूमि, प्रतीक, अलंकार, उपदेश, दूती, बिंब-प्रतिबिंब, मानवीकरण, रहस्य, मानवीय भावनाओं का आरोपण आदि कई प्रकार से प्रकृति-वर्णन सजीव होता रहा है। इस चयन में प्रस्तुत है—प्रकृति विषयक कविताओं का एक विशिष्ट संकलन।

कविता120

प्रेम री परीभाषा

सत्येंद्र चारण

डांडी रौ उथळाव

तेजस मुंगेरिया

अेकला बळै

आशीष बिहानी

परेम

अंजु कल्याणवत

ठूंठ

गजेसिंह राजपुरोहित

काळ

कन्हैयालाल सेठिया

अै कठफोड़ा

शिवराज छंगाणी

सौरम रो भभको

रामस्वरूप किसान

ध्वनि परस

रामस्वरूप किसान

टीब्बा

अंजु कल्याणवत

नंग धड़ंग अरावळी

कन्हैयालाल सेठिया

धरती'र भासा!

कन्हैयालाल सेठिया

म्हारौ गांव

हरमन चौहान

धुंवाड़ौ

उपेन्द्र अणु

ओळूं

सत्येन जोशी

करसाणी म्हारा गांव री

फतहलाल गुर्जर 'अनोखा'

मावटो

फतहलाल गुर्जर 'अनोखा'

सबद चिरकली

भगवती लाल व्यास

अभेद-भेद !

कन्हैयालाल सेठिया

बसन्त-विहार

बद्रीदान गाडण

जोवो तो सरी

पुरुषोत्तम छंगाणी

हे! कुनामी, कुकर्‌मी-सुनामी

तारालक्ष्मण गहलोत

गीतां को गेलो

प्रेमजी ‘प्रेम’

माया री सिस्टी

सत्यनारायण इन्दौरिया

वाह भई शेखावाटी

मुरली बासोतिया

फरक दीठ रो

मदन गोपाल लढ़ा

पसु

रामस्वरूप किसान

मीठी तान

धनंजया अमरावत

थूर

शैलेन्द्र उपाध्याय

तीन मुक्तक

कल्याणसिंह राजावत

जद हरी करै

सांवर दइया

मौसम

गोरधन सिंह शेखावत

अेक पानू फैरू खरीग्यू

भविष्यदत्त ‘भविष्य’

रोहिड़ै रौ फूल

शिवराज छंगाणी

रेत में मधुमास

इन्द्र प्रकाश श्रीमाली

किरड़कांटियो

कन्हैयालाल सेठिया

सूरज मुळकै

इरशाद अज़ीज़

स्यात यूं मुळकै

सतीश छिम्पा

अंतस् मीठास

शिवराज छंगाणी

पूजा जोग

राधेश्याम 'अटल'

म्हे गीतां का बिणजारा

बनवारीलाल मिश्र ‘सुमन’

तपता सूरज नै कहिज्यौ रै

कल्याणसिंह राजावत

बिरखा आई रे

श्यामसुन्दर ‘श्रीपत’

आसरौ

शिवराज छंगाणी

ह्वेइछांग

माओत्से तुङ्ग

मोट्यार मौसम

प्रेमजी ‘प्रेम’

तीज रा चितराम

शिवराज भारतीय