तपती धरती पर

छांट पड़ी है

जाणै तोवै पर‌ ‍पड़ी है

अैन बियां

छांट रै च्यारूंमेर

भाप रो भरम छोड़तो

छल्लै रै आकार रो

धूळ रो घेरो बण’र

आभै कानी भाज्यो है

इणरै साथै

नथूणां में धरती री सौरम रो

भभको फूट्यो है

आखी जीयाजूण

किस्तूरी मिरग बणगी।

स्रोत
  • पोथी : म्हैं अन्नदाता कोनी ,
  • सिरजक : रामस्वरूप किसान ,
  • प्रकाशक : बोधि प्रकाशन ,
  • संस्करण : pratham
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