जूण पर कवितावां

जहाँ जीवन को स्वयं कविता

कहा गया हो, कविता में जीवन का उतरना अस्वाभाविक प्रतीति नहीं है। प्रस्तुत चयन में जीवन, जीवनानुभव, जीवन-संबंधी धारणाओं, जीवन की जय-पराजय आदि की अभिव्यक्ति देती कविताओं का संकलन किया गया है।

कविता786

हरिया रूंख

अंजु कल्याणवत

परेम

अंजु कल्याणवत

पिरोळ में कुत्ती ब्याई

अन्नाराम ‘सुदामा'

काळ

मणि मधुकर

डांडी रौ उथळाव

तेजस मुंगेरिया

दीठाव रै बेजा मांय

तेजसिंह जोधा

अरे बुझागड़!

गणेशीलाल व्यास 'उस्ताद'

काची-पाकी जूण

आशीष पुरोहित

आ दिनां

संदीप 'निर्भय'

कठा सूं आवै है सबद

भगवती लाल व्यास

मिनख री सुतंतरता

रेणुका व्यास 'नीलम'

अणहद नाद

भगवती लाल व्यास

दीवट

गणेशीलाल व्यास 'उस्ताद'

सांझ-सुंदरी

महेंद्रसिंह छायण

सवाल रेखागणित रो

चेतन स्वामी

मोरियो

अंजु कल्याणवत

ट्रेक्टर

जगदीश गिरी

सतिये नै सीख

सत्येंद्र चारण

मिजाज

कैलाश मंडेला

गांव री कांदा-रोटी

मृदुला राजपुरोहित

शमसाँण री कणेर

भगवती लाल व्यास

सूरमा

पवन सिहाग 'अनाम'

भड़ास

विमला महरिया 'मौज'

नदी अर मजल

कैलाश कबीर

अंतस रो दीवो

सुमन बिस्सा

धुड़कै जूण

राजूराम बिजारणियां

घूमर

नारायण सिंह भाटी

बदळाव

कृष्ण कल्पित

दौरो घणो जीणो

कृष्णा आचार्य

पांखी री पीड़

भगवती लाल व्यास

बंटवारो

भगवती लाल व्यास

दिवलो बणूं

श्याम सुन्दर टेलर

ईसकौ

येव्गेनी येव्तुशेंको

अड़वो

गजानन वर्मा

अलीसन कोसे री मोत माथै

येवेजनी येव्तुसेंको

कब्बर

मणि मधुकर

चिंता नीं करणी

नगेन्द्र नारायण किराडू

रिगदोळ

मणि मधुकर

सतजुग

रामेश्वर दयाल श्रीमाली

दूजी पीड़ मुलावै

सीताराम महर्षि

महामिलन

कृष्णा कुमारी ‘कमसिन’

माटी रो ढगळ

इरशाद अज़ीज़

दुहागण रौ दरद

निर्मला राठौड़

थारी आफळ

नंद भारद्वाज

नुसखौ

चन्द्र प्रकाश देवल

जेठ में

गोरधन सिंह शेखावत