जूण पर कवितावां

जहाँ जीवन को स्वयं कविता

कहा गया हो, कविता में जीवन का उतरना अस्वाभाविक प्रतीति नहीं है। प्रस्तुत चयन में जीवन, जीवनानुभव, जीवन-संबंधी धारणाओं, जीवन की जय-पराजय आदि की अभिव्यक्ति देती कविताओं का संकलन किया गया है।

कविता920

परेम

अंजु कल्याणवत

पिरोळ में कुत्ती ब्याई

अन्नाराम ‘सुदामा'

कठा सूं आवै है सबद

भगवती लाल व्यास

अरे बुझागड़!

गणेशीलाल व्यास 'उस्ताद'

हरिया रूंख

अंजु कल्याणवत

आ दिनां

संदीप 'निर्भय'

काची-पाकी जूण

आशीष पुरोहित

दीठाव रै बेजा मांय

तेजसिंह जोधा

डांडी रौ उथळाव

तेजस मुंगेरिया

काळ

मणि मधुकर

मिजाज

कैलाश मंडेला

आ बैठ बात करां - 3

रामस्वरूप किसान

मिनख री सुतंतरता

रेणुका व्यास 'नीलम'

आ बैठ बात करां - 2

रामस्वरूप किसान

सांझ-सुंदरी

महेंद्रसिंह छायण

ट्रेक्टर

जगदीश गिरी

मोरियो

अंजु कल्याणवत

पगफेरौ

मणि मधुकर

शमसाँण री कणेर

भगवती लाल व्यास

सूरमा

पवन सिहाग 'अनाम'

दीठ रो फरक

आरती छंगाणी

भड़ास

विमला महरिया 'मौज'

कवि अर कवितावां

रेवंत दान बारहठ

पांखी री पीड़

भगवती लाल व्यास

सवाल रेखागणित रो

चेतन स्वामी

उडीक

नंद भारद्वाज

आ बैठ बात करां - 4

रामस्वरूप किसान

अणहद नाद

भगवती लाल व्यास

दीवट

गणेशीलाल व्यास 'उस्ताद'

आ बैठ बात करां - 6

रामस्वरूप किसान

यक्ष सवाल

रेवंत दान बारहठ

उजास उडीक

रेवंत दान बारहठ

पाछा चालो खेत में

विमला महरिया 'मौज'

बंटवारो

भगवती लाल व्यास

घूमर

नारायण सिंह भाटी

दौरो घणो जीणो

कृष्णा आचार्य

बदळाव

कृष्ण कल्पित

नदी अर मजल

कैलाश कबीर

अंतस रो दीवो

सुमन बिस्सा

आ बैठ बात करां - 7

रामस्वरूप किसान

धुड़कै जूण

राजूराम बिजारणियां

सौरम रो भभको

रामस्वरूप किसान

सतिये नै सीख

सत्येंद्र चारण

गांव री कांदा-रोटी

मृदुला राजपुरोहित

गिरस्ती काची पड़ी

तारादत्त निर्विरोध

बापड़ो बी.बी.

बरतोल्त ब्रैख्त

म्हारी आ लापरवाही

भागीरथसिंह भाग्य

नुसखौ

चन्द्र प्रकाश देवल