जूण पर कवितावां

जहाँ जीवन को स्वयं कविता

कहा गया हो, कविता में जीवन का उतरना अस्वाभाविक प्रतीति नहीं है। प्रस्तुत चयन में जीवन, जीवनानुभव, जीवन-संबंधी धारणाओं, जीवन की जय-पराजय आदि की अभिव्यक्ति देती कविताओं का संकलन किया गया है।

कविता838

दीठाव रै बेजा मांय

तेजसिंह जोधा

परेम

अंजु कल्याणवत

पिरोळ में कुत्ती ब्याई

अन्नाराम ‘सुदामा'

हरिया रूंख

अंजु कल्याणवत

काची-पाकी जूण

आशीष पुरोहित

आ दिनां

संदीप 'निर्भय'

काळ

मणि मधुकर

डांडी रौ उथळाव

तेजस मुंगेरिया

कठा सूं आवै है सबद

भगवती लाल व्यास

अरे बुझागड़!

गणेशीलाल व्यास 'उस्ताद'

उजास उडीक

रेवंत दान बारहठ

अंतस रो दीवो

सुमन बिस्सा

नदी अर मजल

कैलाश कबीर

सांझ-सुंदरी

महेंद्रसिंह छायण

ट्रेक्टर

जगदीश गिरी

मोरियो

अंजु कल्याणवत

पगफेरौ

मणि मधुकर

धुड़कै जूण

राजूराम बिजारणियां

गांव री कांदा-रोटी

मृदुला राजपुरोहित

सतिये नै सीख

सत्येंद्र चारण

दीवट

गणेशीलाल व्यास 'उस्ताद'

घूमर

नारायण सिंह भाटी

बदळाव

कृष्ण कल्पित

बंटवारो

भगवती लाल व्यास

पाछा चालो खेत में

विमला महरिया 'मौज'

भड़ास

विमला महरिया 'मौज'

कवि अर कवितावां

रेवंत दान बारहठ

पांखी री पीड़

भगवती लाल व्यास

मिनख री सुतंतरता

रेणुका व्यास 'नीलम'

मिजाज

कैलाश मंडेला

सवाल रेखागणित रो

चेतन स्वामी

दीठ रो फरक

आरती छंगाणी

सूरमा

पवन सिहाग 'अनाम'

शमसाँण री कणेर

भगवती लाल व्यास

अणहद नाद

भगवती लाल व्यास

दौरो घणो जीणो

कृष्णा आचार्य

मत पीटै नित ढोल

सीताराम महर्षि

त्यारी

कैलाश कबीर

मौसम

गोरधन सिंह शेखावत

आ बैठ बात करां - 7

रामस्वरूप किसान

कठै गई बा...

दुष्यन्त जोशी

म्हे सब देखां

नन्दकिशोर चतुर्वेदी

खेजड़ी

नंद भारद्वाज

मिनख-जूँण

शिव 'मृदुल'

अठहत्तरूंवो पान्नौ

संदीप 'निर्भय'

कसर नहीं है स्याणै में

भागीरथसिंह भाग्य

होतब-अण होतब

अम्बिका दत्त

बाजो

सत्यनारायण ‘सत्य’