जूण पर कवितावां

जहाँ जीवन को स्वयं कविता

कहा गया हो, कविता में जीवन का उतरना अस्वाभाविक प्रतीति नहीं है। प्रस्तुत चयन में जीवन, जीवनानुभव, जीवन-संबंधी धारणाओं, जीवन की जय-पराजय आदि की अभिव्यक्ति देती कविताओं का संकलन किया गया है।

कविता857

परेम

अंजु कल्याणवत

पिरोळ में कुत्ती ब्याई

अन्नाराम ‘सुदामा'

कठा सूं आवै है सबद

भगवती लाल व्यास

अरे बुझागड़!

गणेशीलाल व्यास 'उस्ताद'

काची-पाकी जूण

आशीष पुरोहित

काळ

मणि मधुकर

डांडी रौ उथळाव

तेजस मुंगेरिया

दीठाव रै बेजा मांय

तेजसिंह जोधा

आ दिनां

संदीप 'निर्भय'

हरिया रूंख

अंजु कल्याणवत

सांझ-सुंदरी

महेंद्रसिंह छायण

ट्रेक्टर

जगदीश गिरी

मोरियो

अंजु कल्याणवत

पगफेरौ

मणि मधुकर

सूरमा

पवन सिहाग 'अनाम'

शमसाँण री कणेर

भगवती लाल व्यास

नदी अर मजल

कैलाश कबीर

अंतस रो दीवो

सुमन बिस्सा

धुड़कै जूण

राजूराम बिजारणियां

गांव री कांदा-रोटी

मृदुला राजपुरोहित

सतिये नै सीख

सत्येंद्र चारण

घूमर

नारायण सिंह भाटी

बदळाव

कृष्ण कल्पित

दौरो घणो जीणो

कृष्णा आचार्य

दीठ रो फरक

आरती छंगाणी

कवि अर कवितावां

रेवंत दान बारहठ

भड़ास

विमला महरिया 'मौज'

पाछा चालो खेत में

विमला महरिया 'मौज'

यक्ष सवाल

रेवंत दान बारहठ

पांखी री पीड़

भगवती लाल व्यास

बंटवारो

भगवती लाल व्यास

मिजाज

कैलाश मंडेला

उजास उडीक

रेवंत दान बारहठ

सवाल रेखागणित रो

चेतन स्वामी

दीवट

गणेशीलाल व्यास 'उस्ताद'

मिनख री सुतंतरता

रेणुका व्यास 'नीलम'

अणहद नाद

भगवती लाल व्यास

कांई होसी?

प्रेमजी ‘प्रेम’

अेका-दोई

चन्द्र प्रकाश देवल

बिना सबद रो प्रेमगीत

किशोर कल्पनाकान्त

सपनो

गोरधन सिंह शेखावत

रंग दे चादर

नैनमल जैन

गरीबी रा झाड़

हरदान हर्ष

कविता कोरी रेत री

सत्यनारायण सोनी

जात्रा

सतीश छिम्पा

ढूमलो

प्रेमजी ‘प्रेम’