जूण पर गीत

जहाँ जीवन को स्वयं कविता

कहा गया हो, कविता में जीवन का उतरना अस्वाभाविक प्रतीति नहीं है। प्रस्तुत चयन में जीवन, जीवनानुभव, जीवन-संबंधी धारणाओं, जीवन की जय-पराजय आदि की अभिव्यक्ति देती कविताओं का संकलन किया गया है।

गीत90

रण-लोरी

मेघराज मुकुल

थोड़ी-सी जिंदगाणी में

कानदान ‘कल्पित’

मनभावण बसंत आयो री

चंद्र सिंह बिरकाळी

गा लेवूं पूरौ गीत

किशोर कल्पनाकान्त

पग डांडी रा मोड़

मोहम्मद सदीक

रात घणेरी प्यारी

किशोर कल्पनाकान्त

लोह्या का दन

मुकुट मणिराज

धुण रे पिंजारा

गजानन वर्मा

रोणै रौ राग

फेदेरीको गार्सिया लोर्का

नांव सुमरणौ भूल्यौ

किशोर कल्पनाकान्त

जीवण नद यूं बहतो जावै

चंद्र सिंह बिरकाळी

हाळी हलकारौ दे

गजानन वर्मा

सवारता–सवारता

कानदान ‘कल्पित’

रुत अलबेली

गजानन वर्मा

कथना-तणौ गीत

किशोर कल्पनाकान्त

दीवाळी रो गीत

गजानन वर्मा

भाया, गूढ़ ग्यान मत दीजै

मानसिंह शेखावत ‘मऊ’

नूवां अरथ

मोहम्मद सदीक

नारंगी रै सूखा दरख्त रो गीत

फेदेरीको गार्सिया लोर्का

जिनगाणी

रामनिवास सोनी

पनवाड़ी

मुकुट मणिराज

काला बाजार

श्रीनाथ मोदी

चाक पै

दुर्गादान सिंह गौड़

मत जाओ पिया परदेस

श्रीनाथ मोदी

डर सूं डरो

मोहम्मद सदीक

गीत : समझावणी रो

ओंकार श्री

हालरियौ

रेवतदान चारण कल्पित

गीत

ओमप्रकाश लीची ‘दिल’

गाड़ियो लुहार

मुकुट मणिराज

धर कूचां

गजानन वर्मा

जगती सूं अब नहीं डरूं मैं

चंद्र सिंह बिरकाळी

कोरा कागजां साथै

अनिला राखेचा

गीत : बिलोवणै रो

ओंकार श्री

धन म्हारी पोशाळ

मोहन मण्डेला

कद तांई दुख नै पीणौ है?

बी. आर. प्रजापति

गीत : राईकै रो

ओंकार श्री

मास बरसालो आयो रे

कानदान ‘कल्पित’

ढळती छाया है

कानदान ‘कल्पित’

आंसू क्यूं बरसावै?

किशोर कल्पनाकान्त