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8
मन मांनि रे मर्यो
ऊमरदान लालस
समज मन सील सदा सुखदाई
ऊमरदान लालस
भो जल क्यूँ तिरो रे
बखना जी
अवधू सब सुख की निधि पाई
संत हरदास
भरमतो भरमतो, तुम्हारै सरणै आयो
बखना जी
जोवन ज्युं नदी नीर जात
जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’
भाव भजन की भाठी आगे
बखना जी
ऊठि कहा सोइ रह्यउ
जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’