जूण पर सोरठा

जहाँ जीवन को स्वयं कविता

कहा गया हो, कविता में जीवन का उतरना अस्वाभाविक प्रतीति नहीं है। प्रस्तुत चयन में जीवन, जीवनानुभव, जीवन-संबंधी धारणाओं, जीवन की जय-पराजय आदि की अभिव्यक्ति देती कविताओं का संकलन किया गया है।

सोरठा31

धन, तन, गिटसी धाम

साह मोहनराज

हँस कर बोल हमेश

साह मोहनराज

रैन दिनां मत रोय

साह मोहनराज

एक न फळै उपाय

साह मोहनराज

गुण बिन करै गरूर

साह मोहनराज

आवत दुख इकसार

साह मोहनराज

बचणौ मुश्किल बात

साह मोहनराज

संपति चली न साथ

साह मोहनराज

सब दिन नहीं समान

साह मोहनराज

आयुस भर आराम

साह मोहनराज

भूखा मांगैं भीख

चन्द्रशेखर व्यास

भूंडो अपणो भाग

साह मोहनराज

हरी करै सो होय

साह मोहनराज

होणहार रो हाल

साह मोहनराज

जबर जबर जोधार

साह मोहनराज

छिन में देसी छोड़

साह मोहनराज

अंतै जहर उगळैह

कानसिंह भाटी

बिरला होवे बीर

साह मोहनराज

चित हित सूं कर चाव

साह मोहनराज

बखत जावसी बीत

साह मोहनराज

हिम्मत तब ही होय

साह मोहनराज

सब जानत संसार

साह मोहनराज

खरी कमाई खाय

साह मोहनराज

सादिया रा सौरठा

मोहम्मद सदीक

बीती करो न बात

साह मोहनराज

बैरी पूछै बात

साह मोहनराज