जूण पर ग़ज़ल

ग़ज़ल67

अठीनै सूं निकळसी बा

भागीरथसिंह भाग्य

थां सिरजो चितराम

सवाई सिंह शेखावत

खूब दनां में आया जी

कृष्णा कुमारी ‘कमसिन’

रिकस्या आळो

रामस्वरूप ‘परेश’

घणो काळज्यो खायो

शांति भारद्वाज 'राकेश'

ग़ज़ल

शांति भारद्वाज 'राकेश'

चोरी रो धन धूड़ भायला

जेठानंद पंवार

जीवण मांय पड़ाव मोकळा

शंकरलाल स्वामी

बोल थारो काई हाल छै

हेमन्त गुप्ता पंकज

अस्यौ कस्यौ रूंख

विनोद सोमानी 'हंस'

अै खिलाड़ी बावळा है

रामेश्वर दयाल श्रीमाली

धूड पर जाजम धरो री ढाल़ दूं

नरपत आशिया "वैतालिक"

ढाणी म्हानै जमांणी छै

लक्ष्मणदान कविया

न हो तिल बी जघां भी झाड़

भागीरथसिंह भाग्य

मत चिलकावै ठाठ भायला

जयकुमार ‘रुसवा’

बात ई बात में

लियाकत अली खां ‘भावुक’

मिलै नीं अठै सुखड़ो राम

लक्ष्मीनारायण रंगा

जीवण रो दै मोल भलोड़ा

अब्दुल समद ‘राही’

कठै-कठै

रामेश्वर दयाल श्रीमाली

करमां में रेख क्यूं

लालदास 'राकेश'

थारी म्हारी का भूंजा क्यूं लादणा

शांति भारद्वाज 'राकेश'

थोड़ै सबदां में

मधुकर गौड़

यो सलाम बी घाटा को

शांति भारद्वाज 'राकेश'

नदी झील सागर रा किस्सा

कुंदन सिंह 'सजल'

जिन्दगी

अब्दुल समद ‘राही’

मरनौ तो अटल है भाया

अब्दुल समद ‘राही’

ऊ जद बी झाँकै आकाँ सूँ

पुरुषोत्तम 'यकीन'

काल की चंता कांई

पुरुषोत्तम 'यकीन'

आंगण रो आभो ओढ़्यां

लक्ष्मीनारायण रंगा

खुसबू रळी मन-प्राण में

किशोर कल्पनाकान्त

कहणो म्हारो मान भायला

चन्द्रसिंह चेतन