जूण पर ग़ज़ल

जहाँ जीवन को स्वयं कविता

कहा गया हो, कविता में जीवन का उतरना अस्वाभाविक प्रतीति नहीं है। प्रस्तुत चयन में जीवन, जीवनानुभव, जीवन-संबंधी धारणाओं, जीवन की जय-पराजय आदि की अभिव्यक्ति देती कविताओं का संकलन किया गया है।

ग़ज़ल32

पाणी आडी पाळ खेजड़ी

गोकुल खिड़िया

बात बात पर अड़णो के

राजूराम बिजारणियां

नया साल में मंसा

रामेश्वर शर्मा ‘रामूभैया’

थां सिरजो चितराम

सवाई सिंह शेखावत

खूब दनां में आया जी

कृष्णा कुमारी ‘कमसिन’

रिकस्या आळो

रामस्वरूप ‘परेश’

घणो काळज्यो खायो

शांति भारद्वाज 'राकेश'

ग़ज़ल

शांति भारद्वाज 'राकेश'

बोल थारो काई हाल छै

हेमन्त गुप्ता पंकज

अस्यौ कस्यौ रूंख

विनोद सोमानी 'हंस'

धूड पर जाजम धरो री ढाल़ दूं

नरपत आशिया "वैतालिक"

मिलै नीं अठै सुखड़ो राम

लक्ष्मीनारायण रंगा

जीवण रो दै मोल भलोड़ा

अब्दुल समद ‘राही’

जिन्दगी

अब्दुल समद ‘राही’

ऊ जद बी झाँकै आकाँ सूँ

पुरुषोत्तम 'यकीन'

काल की चंता कांई

पुरुषोत्तम 'यकीन'

खुसबू रळी मन-प्राण में

किशोर कल्पनाकान्त

फूंक दे, फूंक! आग चेतेगा

पुष्कर 'गुप्तेश्वर'

मत चिलकावै ठाठ भायला

जयकुमार ‘रुसवा’

बात ई बात में

लियाकत अली खां ‘भावुक’

ढाणी ढाणी फिरतां

लक्ष्मणदान कविया

ढाणी म्हानै जमांणी छै

लक्ष्मणदान कविया