जूण पर सबद

जहाँ जीवन को स्वयं कविता

कहा गया हो, कविता में जीवन का उतरना अस्वाभाविक प्रतीति नहीं है। प्रस्तुत चयन में जीवन, जीवनानुभव, जीवन-संबंधी धारणाओं, जीवन की जय-पराजय आदि की अभिव्यक्ति देती कविताओं का संकलन किया गया है।

सबद12

गुरु बिन कौन मिटावै भवदुख

परमहंस स्वामी ब्रह्मानन्द

वाहवा क्या खेल रचाया है

परमहंस स्वामी ब्रह्मानन्द

जोग जुगत हम पाई रे

परमहंस स्वामी ब्रह्मानन्द

नहिं आते हो नहिं आते हो

परमहंस स्वामी ब्रह्मानन्द

चेतावनी भजन

ऊमरदान लालस

अचरज देखा भारी साधो

परमहंस स्वामी ब्रह्मानन्द