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12
गुरु बिन कौन मिटावै भवदुख
परमहंस स्वामी ब्रह्मानन्द
राम सांच जग झूठ है, बण-बण के मिट जाय
फूलीबाई
वाहवा क्या खेल रचाया है
परमहंस स्वामी ब्रह्मानन्द
जिवड़ा जाय कहा तूँ रहसी वे
हरिदास निरंजनी
जोग जुगत हम पाई रे
परमहंस स्वामी ब्रह्मानन्द
नहिं आते हो नहिं आते हो
परमहंस स्वामी ब्रह्मानन्द
चेतावनी भजन
ऊमरदान लालस
सोई दिन आवेगा, अपणो राम संभालि वे
हरिदास निरंजनी
अचरज देखा भारी साधो
परमहंस स्वामी ब्रह्मानन्द
जोत खड़ी कर जमों जगावो
लालनाथ जी
समझि देखि कुछ नांही रे..!
हरिदास निरंजनी
राम विसारि मांरे ‘प्रान'
हरिदास निरंजनी