जूण पर छंदां

जहाँ जीवन को स्वयं कविता

कहा गया हो, कविता में जीवन का उतरना अस्वाभाविक प्रतीति नहीं है। प्रस्तुत चयन में जीवन, जीवनानुभव, जीवन-संबंधी धारणाओं, जीवन की जय-पराजय आदि की अभिव्यक्ति देती कविताओं का संकलन किया गया है।

छंद2

मैं लुगाई

मीनाक्षी पारीक

राजनीति तो गादड़ी

मुखराम माकड़ ‘माहिर’