जूण पर बंतळ
प्राथमिक शिक्षा रौ माध्यम तौ मायड़ भाषा ई होवणौ चाइजै देस-परदेस रै शिक्षा-जगत में जिण नांव री साख देतां राजस्थान वासी गुमेज कर सकै वो अेक नांव है प्रोफेसर वी.वी. जॉन। प्रो. जॉन राजस्थान रा जाया जलम्या नी है, पण वै आज री घड़ी अेक राजस्थानी सूं बत्ता
म्हारी फिलमां होमवर्क बिज्जी री लोक कथा ‘दुविधा’ पछै मुक्ति बोध री रचनावां माथै ‘सतह से उठता आदमी’ फिलम बणा’र कला-फिलमां रा निदेसक मणी कौल फेर चरचा में आया। अबार दिल्ली रै आठवैं फिलम फेस्टीवल में वांरी छोटी फिलम ‘अराइवल’ नै सिरै फिलम होवण रौ इनांम मिळियौ। तेजसिंघ
मीना सूं उळझाव म्हारी जिंदगांणी रौ सब सूं घटिया बगत हौ कमाल अमरोही रौ नांव आज फिलमां में किणी सूं छांनौ कोनी। वै आज तांईं 9 फिलमां बणाई, अर अेक सूं अेक आला। ‘महल’, ‘पाकीज़ा’ अर ‘दायरा’ जैड़ी हिन्दी री टाळवी अर नांमी फिलमां रा निरदेसक कमाल भाई जद पाछला
राजस्थानी नै मानता अवस मिळसी : पुरुषोत्तम स्वामी पुरुषोत्तमदास जी स्वामी रौ जलम सन 1913 में बीकानेर में होयौ। आप राजस्थानी हिन्दी अर संस्कृत रा मानीता विद्वान। अबार स्वामीजी ‘राजस्थानी ज्ञानपीठ संस्थान बीकानेर’ रा पीठाधिपति अर ‘राजस्थानी गंगा’ नांव
रावत सारस्वत राजस्थांनी भासा रा नांमी विदवांन। लारला 30-40 बरसां सूं राजस्थांनी रा भांत-भांत रा कामां सूं जुड़िया थका। आप राजस्थांनी भासा साहित-संगम, बीकानेर रा सभापती रह्या अर राजस्थांन भासा प्रचार सभा, जैपर रा सचीव ई। सचीव पद माथै तौ इण वगत ई छै। ‘माणक’
भारतीय क्रिकेट रौ स्तर बढ़ रैयौ है लारलै दिनां धोरां-धरती री सांस्कृतिक राजधानी जोधपुर रै उम्मेद भवन पैलेस में ग्वालियर सूटिंग रौ विज्ञापन संस्था अेम. अे.पी.पी. रै वास्तै छायांकन करण रै सिलसिलै में क्रिकेट जगत रा जगचावा खिलाड़ी अर पटौदी नवाब मंसूर अली
मांड म्हनै घणी पसंद है चन्द्राणी मुखर्जी गीत-संगीत—खासकर फिलमी संगीत री दुनियां रौ अेक सैंधौ-मैंधौ नांव है। ‘ओ रे सजनवा क्या होती है’ गीत सूं खुद री पिछांण बणावण आळी अर ‘मेरे मेहबूब शायद आज कुछ नाराज हैं मुझसे’ गीत सूं प्रसिद्धि अर लोकप्रियता रै