आ कहांणी कोनी
जगचावी! मसहूर! बे-जोड़! उस्ता चित्रकला। म्हैं ‘आर्ट-गैलरी’ में खड़ी ऊंट री खाल पर सोनै रै पांणी अर रंगां सूं बण्योड़ा चितरांम देखै ही, जिका दरसकां नैं जबरदस्ती आप कांनी खींच लेवै। राधा-किसन रा चितरांम, रासलीला रा चितरांम, बणी-ठणी, महेंद्र-मूमल, ढोला-मारवणी