धरती पर कवितावां

पृथ्वी, दुनिया, जगत।

हमारे रहने की जगह। यह भी कह सकते हैं कि यह है हमारे अस्तित्व का गोल चबूतरा! प्रस्तुत चयन में पृथ्वी को कविता-प्रसंग में उतारती अभिव्यक्तियों का संकलन किया गया है।

कविता159

माटी थनै बोलणौ पड़सी

रेवतदान चारण कल्पित

धरती काती प्रीत

राजूराम बिजारणियां

आभै उतरी प्रीत

राजूराम बिजारणियां

सौरम रो भभको

रामस्वरूप किसान

झूठ री जड़

गजेसिंह राजपुरोहित

धरती'र भासा!

कन्हैयालाल सेठिया

म्हारौ राजस्थान

रामाराम चौधरी

भटकाव

मदन सैनी

काळ

कन्हैयालाल सेठिया

आसान कोनी

सुमन पड़िहार

प्रणय

ओमप्रकाश गर्ग 'मधुप'

हिलमिल चालो

त्रिलोक शर्मा

बै अर आपां

निशान्त

चावना

वाज़िद हसन काजी

जैसलमेर

चंद्रशेखर अरोड़ा

आवो आपां घूमां

दुष्यन्त जोशी

धरती री उमर तांई

बी. एल. माली ‘अशान्त’

धरती अर नारी

मुलदागालीयेव

सीतकाळ

अनातोली साफ्रोनोव

माटी

देवीलाल महिया

धरती

कन्हैयालाल सेठिया

गुलेळ

हरीश सुवासिया

रिस्तौ

केशव पथिक आचार्य

धरती मा

भंवर कसाना

धरती रो धणी

दूदसिंह काठात

वंदण

रसूल हमजातोव

किण नै दोस देवां

पुरुषोत्तम छंगाणी

मोट्यार मौसम

प्रेमजी ‘प्रेम’

फगत दरखत

भंवरसिंह सामौर

ताणियोड़ी भरत माथै

मीठेश निर्मोही

बता बेकळू

ओम पुरोहित ‘कागद’

थारै हुवण री

सांवर दइया

धुंवाड़ौ

उपेन्द्र अणु

बीं सागण भौम

मदन गोपाल लढ़ा

धरती री मुळक

रमेश मयंक

करसाणी म्हारा गांव री

फतहलाल गुर्जर 'अनोखा'

जागो और जगाओ

कल्याणसिंह राजावत

थळवट रौ उमराव

सुमन बिस्सा

बीज

ओम नागर

चतराम

जितेन्द्र निर्मोही

गा

मनोज कुमार स्वामी

पृथ्वी

मालचंद तिवाड़ी

धरती रो काया कलप

सत्येन जोशी

कीं नान्ही कवितावां (क्षणिका)

घनश्याम नाथ कच्छावा