धरती पर दूहा

पृथ्वी, दुनिया, जगत।

हमारे रहने की जगह। यह भी कह सकते हैं कि यह है हमारे अस्तित्व का गोल चबूतरा! प्रस्तुत चयन में पृथ्वी को कविता-प्रसंग में उतारती अभिव्यक्तियों का संकलन किया गया है।

दूहा8

आभो धररायो अबै (बादळी)

चंद्र सिंह बिरकाळी

वीजां अकुर कूटिया (बादळी)

चंद्र सिंह बिरकाळी

ब्यावलौ

रामस्वरूप किसान

सूरज किरण उंतावळी (बादळी)

चंद्र सिंह बिरकाळी

तोवै ज्यूं धरती तपै (लू)

चंद्र सिंह बिरकाळी