धरती पर काव्य खंड

पृथ्वी, दुनिया, जगत।

हमारे रहने की जगह। यह भी कह सकते हैं कि यह है हमारे अस्तित्व का गोल चबूतरा! प्रस्तुत चयन में पृथ्वी को कविता-प्रसंग में उतारती अभिव्यक्तियों का संकलन किया गया है।

काव्य खंड3

सोभा सैं सूं न्यारी

सत्यनारायण इन्दौरिया

ज़िन्दगी खुली पोथी

घनश्याम लाडला

दयाल माया द्वादसी

प्रवीण बारहठ ‘सांगड़’