धरती पर मुक्तक

पृथ्वी, दुनिया, जगत।

हमारे रहने की जगह। यह भी कह सकते हैं कि यह है हमारे अस्तित्व का गोल चबूतरा! प्रस्तुत चयन में पृथ्वी को कविता-प्रसंग में उतारती अभिव्यक्तियों का संकलन किया गया है।

मुक्तक3

ब्याळू कर जुग रो भागीरथ

भगवती लाल व्यास

रेत रा दो चार कण

भगवती लाल व्यास

इण धरती री भोळी मायड़

भगवती लाल व्यास