गीत
गीत में गेयता इण रो प्रधान गुण हुवै। स्वर अर ताल लय रै सबदां री जोड़ सूं चावी रचना गीत हुवै है। राजस्थानी गीत काव्य परंपरा री लूंठी विधा है।
गीत में गेयता इण रो प्रधान गुण हुवै। स्वर अर ताल लय रै सबदां री जोड़ सूं चावी रचना गीत हुवै है। राजस्थानी गीत काव्य परंपरा री लूंठी विधा है।
आधुनिक राजस्थानी साहित्य मांय पै’ली पांत रा सिरैनांव कवि। 'महाकवि' रै रूप में ई पिछाण।
संस्कृत, फारसी, अरबी, पंजाबी अर डिंगल-पिंगल रा नांमी जाणकार कवि। 'रतन रासौ' अर 'राजसमंद रूपक' नांव रै चावै ग्रंथां रा सिरजक।
राजस्थान रा सिरै क्रन्तिकारी कवि। महाराणा फतेहसिंह नै दिल्ली दरबार में जावण सूं रोकण खातर 13 सोरठा रचिया जिका 'चेतावणी रा चुंघटिया' नांव सूं चावा। आजादी रा हवन में समुचौ परिवार होम दियौ।
लूंठा कवि-गीतकार। ‘कूख पड़यै री पीड़’ कविता संग्रै सारू साहित्य अकादेमी पुरस्कार।
आधुनिक कविता जातरा रा सिरैनांव कवि। 'मानखो', 'जागती जोतां', 'मेघनाद' जेड़ी ख्यात कवितावां रा रचनाकार।
सिरैनांव कवि। 'लू' अर 'बादळी' जेड़ी राजस्थानी साहित्य री कालजयी पोथियाँ रा सिरजक।
रचनावां में वागड़ अंचल री मठोठ। कवि सम्मेलनां में निरवाळी छाप। राजस्थान साहित्य अकादमी सूं सम्मानित।
हाड़ौती अंचल रा चावा लिखारा। राजस्थानी गीत अर दोहां में लगोलग काम। अनुवाद में ई सांवठी भागीदारी ।
अनेकूं दुर्लभ पोथ्यां रा संपादक। सं. 2001 रै दिनाजपुर भाषण सूं ख़ास ओळख। ख्यात गीत 'वीर भू री वीर वाणी' रा रचैता।
नूवी पीढ़ी रा ऊरमावान कवि-गद्यकार। छंद री ठावी समझ। 'डांडी रौ उथळाव' नांव सूं कविता संग्रै प्रकाशित।
‘गांव, गळी, चोबारा छूट्या अेक पेट कै कारणै’ गीत सूं चरचा में। गीतां में गांव-गुवाड़ अर जीयाजूण रा सांवठा चितराम। सिनेमा सूं जुड़ाव। ‘भरत व्यास सम्मान’ सूं आदरीज्योड़ा।
राजस्थानी लोक साहित्य रा चितेरा। 'कळायण' अर ‘दसदेव’ पोथ्यां सूं ठावी ओळखाण।
ख्यातनांव कवि-संपादक। रचनावां में स्वछन्दतावाद रो खासो प्रभाव। राजस्थानी शोध संस्थान रा संस्थापक।
'पीथल' नांव सूं चावा। बीकानेर महाराजा रायसिंह रा छोटा भाई अर राजस्थानी रा सिरै कवि। वीर, सिणगार अर भगती आद सगळी विधावां में सिद्धहस्त।
विश्नोई पंथ रा सिरै कवि, आत्मज्ञानी, साहित प्रेमी अर सिध्द पुरुष। खुद री कवातावां रै अलावा पुराणा संत कवियां री रचनावां ने आपरी लेखनी सू उकेर'र सहेजी।
मध्यकाल रा सिरै डिंगल कवि अर राष्ट्रीय चेतना परक गीत लिखण वाळा पैला कवि। वीर, शृंगार, नीति, भक्ति आद सगळी धारावां में समान रूप सूं सृजन करियो।
चावा साहित्यकार। भाषा अर दूजै विसयां सूं जुड़ियोड़ी लगैटगै दो दरजण पोथियां प्रकाशित।
राजस्थानी मंचीय कविता परम्परा रा खास जातरू। 'हाथ सूं कतर लीनो बोरलो', 'गरीब करोड़पति' आद कविता संग्रै प्रकाशित।
राजस्थानी कविता जातरा रा सिरैनांव कवि-गीतकार। 'सैनाणी' कविता सारु खास पिछाण।
प्रगतिसील धारा रा सिरैनांव कवि। 'धोरा वाळा देस जाग रे' कविता सूं जनता रै हियै मांय आपरी जिग्यां बणावणिया।
मंचा माथै आपरै गीतां सूं ठावी पिछाण बणाई है। कवितावां में आपरै असवाड़ै-पसवाड़ै री चिंतावां नै सामीं लावै।
सुपरिचित कवि। 'द्वारका' कविता संग्रै माथै केंद्रीय साहित्य अकादमी रौ सिरै पुरस्कार।
सिरै कवि-गीतकार। 'ताम झाम सा' अर 'बाबा थारी बकरियां बिदाम खावै रै' जेड़ा गीतां सूं ख्याति।
ख्यात कवि अर समाजवादी। जनकवि रै रूप में पिछाण। 'इंकलाब री आंधी' अर 'लिछमी' कविता उलेखणजोग।
समकालीन कविता में ठावी ठौड़। 'चाल भतूळिया रेत रमां' कविता संग्रै पर साहित्य अकादमी रो युवा पुरस्कार। 'झील,नमक और कुरजां' चर्चा में।
राजस्थानी कवितावां अर ग़ज़ल में लेखणी सवाई। राजस्थान साहित्य अकादमी में लगोलग सेवा।
क्रांति रा कवि रै रूप में चावा। रचनावां में देस भगती रा अर अंग्रेजां रै विरोध रा सुर। 'सगती सुजस', 'वगत वायरो', 'देस दरपण' अर 'साकेत सतक' आद चावी रचनावां।
राजस्थानी रा सुपरिचित साहित्यकार। 'उड़ जा रे सुआ' उपन्यास खातर 'साहित्य अकादमी पुरस्कार' सूं सम्मानित।
बूंदी रा राजकवि। 'वीररसावतार' रे रूप में चावा। डिंगल में ओज सूं ओतप्रोत 'वीर सतसई' अर पिंगल में 'वंश भास्कर' जैड़े वृहद ग्रंथ रा रचनाकार। 'राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी' रो सिरै पुरस्कार इणां रे नांव माथै देइजै।
कवि-लेखक अर पत्रकार। ‘गम्योड़ा सबद’, ‘म्हारो काळजो’ नांव सूं कविता संकलन प्रकाशित।
सही मायनै में जनकवि रै रूप में पिछाण। राजस्थानी-हिंदी रा चावा-ठावा कवि-गीतकार। रेत रै कण-कण रा पारखी। जनवादी लेखक संघठन सूं जुड़ाव।
परवर्ती डिंगल कवियों में सिरै नांव कवि। वीररस रा अद्भुत डिंगल गीतां खातर चावा।