अपणायत पर कवितावां

मिनखीचारै सबद रै ओळै-दोळै

रौ ओ सबद आपरै मांयां एक आत्मिक रिस्तौ ले'न चालै जिणनै आपणौ लोक 'अपणायत'कैवै। अठै संकलित रचनावां अपणायत सूं जुड़ियोड़ी है।

कविता389

आग

हरीश हैरी

हेत प्रेम अपणायत में

श्रवण दान शून्य

धरम री बहन

देवीलाल महिया

पाछा चालो खेत में

विमला महरिया 'मौज'

पोती

हरीश हैरी

दीठ रो फरक

आरती छंगाणी

तूं

सत्य पी. गंगानगर

मिजाज

कैलाश मंडेला

दोजक

बंशी यथार्थ

बा

थानेश्वर शर्मा

बुणगट

भगवती लाल व्यास

हवा आग अर पाणी

ज़ेबा रशीद

थे साहित्यकार हो!

महेन्द्रसिंघ महलान

बात कठे

कृष्णा आचार्य

जोहड़ो

हरीश हैरी

नाणा

विजय गिरि गोस्वामी 'काव्यदीप'

रुठयो इन्दर

श्यामसुन्दर ‘श्रीपत’

थांरै बिना

कृष्णा आचार्य

सीट मिलेगी प्लीज।

मदन गोपाल लढ़ा

बांध आयो तागो

आशीष पुरोहित

घर

अशोक परिहार 'उदय'

राजस्थान

सोनी सांवरमल

हुंस्यार है कांईं

कृष्ण कुमार स्वामी

सोधूं हूं

गिरधारी सिंह राजावत

दादी रो गणित

कृष्ण कुमार स्वामी

जंगळ सूं निकळ

मंगत बादल

अढाई आखरां रौ अभिमन्यु

शंकरसिंह राजपुरोहित

घर-संसार

रतन ‘राहगीर’

मिनख-मिनख री मार

कपिलदेव आर्य

देख-रेख

निशान्त

मिनख रो पतो

कैलाश मंडेला

कींनै फूरसत

धनंजय वर्मा

होसी थारी-म्हारी बातां

दशरथ कुमार सोलंकी

धोरां री धरती

शिवराज भारतीय

जद म्हूं न्हं रहैऊंगो

हेमन्त गुप्ता पंकज

सूरज टंटोळता रह्या

त्रिलोक गोयल

कागलां रै गांव में

महावीर प्रसाद जोशी

बिलोवणो

पूनमचंद गोदारा

मां

अंकिता पुरोहित

बदळाव

तारासिंह

परकत रा पूत

भंवरलाल सुथार

अैलान

सुधीर राखेचा

मा

मोनिका शर्मा