अपणायत पर कवितावां

मिनखीचारै सबद रै ओळै-दोळै

रौ ओ सबद आपरै मांयां एक आत्मिक रिस्तौ ले'न चालै जिणनै आपणौ लोक 'अपणायत'कैवै। अठै संकलित रचनावां अपणायत सूं जुड़ियोड़ी है।

कविता338

आग

हरीश हैरी

हेत प्रेम अपणायत में

श्रवण दान शून्य

धरम री बहन

देवीलाल महिया

पोती

हरीश हैरी

मिजाज

कैलाश मंडेला

जुड़बो

जितेन्द्र निर्मोही

काळ रा तीन ठांव

नन्दकिशोर चतुर्वेदी

म्हारा बछड़िया

कृष्णा आचार्य

नुवोपण

विनोद सोमानी 'हंस'

दीयाळी

ओमदत्त जोशी

संवेदणा

दुष्यन्त जोशी

दीठ रो फरक

आरती छंगाणी

राजस्थान

सोनी सांवरमल

जंगळ सूं निकळ

मंगत बादल

अढाई आखरां रौ अभिमन्यु

शंकरसिंह राजपुरोहित

मिनख-मिनख री मार

कपिलदेव आर्य

मिनख रो पतो

कैलाश मंडेला

होसी थारी-म्हारी बातां

दशरथ कुमार सोलंकी

धोरां री धरती

शिवराज भारतीय

जद म्हूं न्हं रहैऊंगो

हेमन्त गुप्ता पंकज

कागलां रै गांव में

महावीर प्रसाद जोशी

बिलोवणो

पूनमचंद गोदारा

मां

अंकिता पुरोहित

बदळाव

तारासिंह

परकत रा पूत

भंवरलाल सुथार

अैलान

सुधीर राखेचा

मा

मोनिका शर्मा

कुण सूरज री धूंणी तापै

गौरीशंकर ‘भावुक’

आंख्यां मांय हंसतौ गांव

गौरीशंकर निमिवाळ

सुण टीटूड़ी —एक

पृथ्वीराज गुप्ता

भांण-भाई

रामनिरंजन शर्मा ‘ठिमाऊ’

परकत इच्छा

नन्दकिशोर चतुर्वेदी

अंधारै रो हिसाब

अर्जुन अरविन्द

खेजड़ो

तोगाराम गोदारा

इंदर धणख

सीमा भाटी

पिताजी

अंकिता पुरोहित

कांई थांको नांव

सतीश गोल्याण

थारी के पंचायती

मनमीत सोनी

मारग चालण में फरक

अमृतसिंह पंवार

अपणायत

मीठेश निर्मोही

अरदास

शंभुदान मेहडू

चाल थूं क्है दै जै

मंजू किशोर 'रश्मि'

मन

वाज़िद हसन काजी

तिरस अर समन्दर

सुरेन्द्र अंचल

पाछा चालो खेत में

विमला महरिया 'मौज'

मिलण-सिंझ्या

मेघराज मुकुल