अपणायत पर कवितावां

मिनखीचारै सबद रै ओळै-दोळै

रौ ओ सबद आपरै मांयां एक आत्मिक रिस्तौ ले'न चालै जिणनै आपणौ लोक 'अपणायत'कैवै। अठै संकलित रचनावां अपणायत सूं जुड़ियोड़ी है।

कविता386

हेत प्रेम अपणायत में

श्रवण दान शून्य

आग

हरीश हैरी

तूं

सत्य पी. गंगानगर

मिजाज

कैलाश मंडेला

धरम री बहन

देवीलाल महिया

पाछा चालो खेत में

विमला महरिया 'मौज'

पोती

हरीश हैरी

दीठ रो फरक

आरती छंगाणी

मिनख अर कागलो

कैलाश मंडेला

चोरी करी पण मै चोर कोनी

अवन्तिका तूनवाल

बापूजी

मोनिका शर्मा

माटी रो खजानौ

शंकरलाल मीणा

दोजक

बंशी यथार्थ

बा

थानेश्वर शर्मा

बुणगट

भगवती लाल व्यास

हवा आग अर पाणी

ज़ेबा रशीद

थे साहित्यकार हो!

महेन्द्रसिंघ महलान

बात कठे

कृष्णा आचार्य

जोहड़ो

हरीश हैरी

नाणा

विजय गिरि गोस्वामी 'काव्यदीप'

रुठयो इन्दर

श्यामसुन्दर ‘श्रीपत’

थांरै बिना

कृष्णा आचार्य

सीट मिलेगी प्लीज।

मदन गोपाल लढ़ा

बांध आयो तागो

आशीष पुरोहित

घर

अशोक परिहार 'उदय'

पा’ड़, जड़ नी है

वासु आचार्य

पोथी रा पानां

दीपचन्द सुथार

परभाती

कल्याणसिंह राजावत

अतीत री छत सूं

नन्दकिशोर चतुर्वेदी

ऊंडी-दीठ

अस्त अली खां मलकांण

मौत रो पर्यायवाची

मेघराज मुकुल

ढळता मोती

महेंद्र मोदी

हथाळ्यां री मुळक

रेणुका व्यास 'नीलम'

कुबोली

अस्त अली खां मलकांण

हेत रो हींडौ

कृष्णा जाखड़

मुरधर रा हीरा

अस्त अली खां मलकांण

हिसाब

रामनाथ कमलाकर

गोभू

विश्वम्भरप्रसाद शर्मा ‘विद्यार्थी’

साथ

प्रदीप भट्ट

डाकियो

रामनिवास सोनी

असल बात

सुधीर राखेचा

म्हारै माथै छात

धनपत स्वामी

जाग्या जी करसाण

रामदयाल मेहरा

राखी

रघुराजसिंह हाड़ा