अपणायत पर कवितावां

मिनखीचारै सबद रै ओळै-दोळै

रौ ओ सबद आपरै मांयां एक आत्मिक रिस्तौ ले'न चालै जिणनै आपणौ लोक 'अपणायत'कैवै। अठै संकलित रचनावां अपणायत सूं जुड़ियोड़ी है।

कविता355

आग

हरीश हैरी

हेत प्रेम अपणायत में

श्रवण दान शून्य

धरम री बहन

देवीलाल महिया

तूं

सत्य पी. गंगानगर

पोती

हरीश हैरी

मिजाज

कैलाश मंडेला

आस

मनमीत सोनी

उपज

मोड़सिंह बल्ला ‘मृगेन्द्र’

ओ जमारो

हरि प्रसाद पारीक

आपरी मातृभाषा

मूळचंद प्राणेश

बिरहण

भवानीसिंह राठौड़ 'भावुक’

मोट्यारां

नंदकिशोर 'निर्झर'

घर

हनुमान प्रसाद 'बिरकाळी'

भांण-भाई

रामनिरंजन शर्मा ‘ठिमाऊ’

कम्पोज

वासुदेव चतुर्वेदी

परकत इच्छा

नन्दकिशोर चतुर्वेदी

अंधारै रो हिसाब

अर्जुन अरविन्द

खेजड़ो

तोगाराम गोदारा

इंदर धणख

सीमा भाटी

पिताजी

अंकिता पुरोहित

कांई थांको नांव

सतीश गोल्याण

बानगी

केशव पथिक आचार्य

जुड़बो

जितेन्द्र निर्मोही

काळ रा तीन ठांव

नन्दकिशोर चतुर्वेदी

म्हारा बछड़िया

कृष्णा आचार्य

नुवोपण

विनोद सोमानी 'हंस'

दीयाळी

ओमदत्त जोशी

संवेदणा

दुष्यन्त जोशी

दीठ रो फरक

आरती छंगाणी

राजस्थान

सोनी सांवरमल

सोधूं हूं

गिरधारी सिंह राजावत

जंगळ सूं निकळ

मंगत बादल

अढाई आखरां रौ अभिमन्यु

शंकरसिंह राजपुरोहित

मिनख-मिनख री मार

कपिलदेव आर्य

देख-रेख

निशान्त

मिनख रो पतो

कैलाश मंडेला

होसी थारी-म्हारी बातां

दशरथ कुमार सोलंकी

धोरां री धरती

शिवराज भारतीय

जद म्हूं न्हं रहैऊंगो

हेमन्त गुप्ता पंकज

सूरज टंटोळता रह्या

त्रिलोक गोयल

कागलां रै गांव में

महावीर प्रसाद जोशी

बिलोवणो

पूनमचंद गोदारा

मां

अंकिता पुरोहित

बदळाव

तारासिंह

परकत रा पूत

भंवरलाल सुथार