अपणायत पर कवितावां

मिनखीचारै सबद रै ओळै-दोळै

रौ ओ सबद आपरै मांयां एक आत्मिक रिस्तौ ले'न चालै जिणनै आपणौ लोक 'अपणायत'कैवै। अठै संकलित रचनावां अपणायत सूं जुड़ियोड़ी है।

कविता337

आग

हरीश हैरी

हेत प्रेम अपणायत में

श्रवण दान शून्य

धरम री बहन

देवीलाल महिया

पोती

हरीश हैरी

मिजाज

कैलाश मंडेला

जुड़बो

जितेन्द्र निर्मोही

काळ रा तीन ठांव

नन्दकिशोर चतुर्वेदी

म्हारा बछड़िया

कृष्णा आचार्य

नुवोपण

विनोद सोमानी 'हंस'

दीयाळी

ओमदत्त जोशी

संवेदणा

दुष्यन्त जोशी

दीठ रो फरक

आरती छंगाणी

राजस्थान

सोनी सांवरमल

जंगळ सूं निकळ

मंगत बादल

अढाई आखरां रौ अभिमन्यु

शंकरसिंह राजपुरोहित

मिनख-मिनख री मार

कपिलदेव आर्य

मिनख रो पतो

कैलाश मंडेला

होसी थारी-म्हारी बातां

दशरथ कुमार सोलंकी

धोरां री धरती

शिवराज भारतीय

जद म्हूं न्हं रहैऊंगो

हेमन्त गुप्ता पंकज

कागलां रै गांव में

महावीर प्रसाद जोशी

बिलोवणो

पूनमचंद गोदारा

मां

अंकिता पुरोहित

परकत रा पूत

भंवरलाल सुथार

अैलान

सुधीर राखेचा

मा

मोनिका शर्मा

कुण सूरज री धूंणी तापै

गौरीशंकर ‘भावुक’

आंख्यां मांय हंसतौ गांव

गौरीशंकर निमिवाळ

सुण टीटूड़ी —एक

पृथ्वीराज गुप्ता

फळ

मंजू किशोर 'रश्मि'

पिताजी

मनमीत सोनी

सुराज रै खांध

कृष्ण बिश्नोई

ओ कुण लुक-छिप आवै

भुवनेश प्रकाशन, बीकानेर

आस

मनमीत सोनी

आपरी मातृभाषा

मूळचंद प्राणेश

बिरहण

भवानीसिंह राठौड़ 'भावुक’

मोट्यारां

नंदकिशोर 'निर्झर'

घर

हनुमान प्रसाद 'बिरकाळी'

प्रीत रो प्रहलाद

वत्सला पांडे

खेजड़ी

अशोक परिहार 'उदय'

आ तो होवणी ई ही

देवकरण जोशी 'दीपक'

मा जद तू ही

ओम पुरोहित ‘कागद’

बाळपणों

अजय कुमार सोनी

प्रीत

मीठेश निर्मोही