अपणायत पर कवितावां

मिनखीचारै सबद रै ओळै-दोळै

रौ ओ सबद आपरै मांयां एक आत्मिक रिस्तौ ले'न चालै जिणनै आपणौ लोक 'अपणायत'कैवै। अठै संकलित रचनावां अपणायत सूं जुड़ियोड़ी है।

कविता360

आग

हरीश हैरी

हेत प्रेम अपणायत में

श्रवण दान शून्य

मिजाज

कैलाश मंडेला

धरम री बहन

देवीलाल महिया

तूं

सत्य पी. गंगानगर

पोती

हरीश हैरी

पिछाण

कैलाश मंडेला

सूरज-उगाळी

गजेन्द्र कंवर चम्पावत

धूळ री जाजम

ओम पुरोहित ‘कागद’

दिन ढळ्यां

थानेश्वर शर्मा

धरती रो हेलो

मेघराज मुकुल

अेक और सदी

हरदान हर्ष

पत राखै पोतियौ

भंवरलाल सुथार

म्हारौ भोळी जीवड़ौ

प्रेमजी ‘प्रेम’

जिनावर अर मिनख

रामस्वरूप ‘परेश’

बाप

पुरुषोत्तम छंगाणी

यादां रो अड़ाव

कृष्ण बृहस्पति

सावणिये रा लोर

सोनी सांवरमल

सोळमौ सावण

शिव 'मृदुल'

हवा री तासीर

भंवर भादानी

हेलो

अशोक परिहार 'उदय'

मां

मंजू किशोर 'रश्मि'

दरद रा डूँगर

नन्दकिशोर चतुर्वेदी

कविता रो मारग

गजेन्द्र कंवर चम्पावत

घर

हनुमान प्रसाद 'बिरकाळी'

प्रीत रो प्रहलाद

वत्सला पांडे

खेजड़ी

अशोक परिहार 'उदय'

आ तो होवणी ई ही

देवकरण जोशी 'दीपक'

मा जद तू ही

ओम पुरोहित ‘कागद’

बाळपणों

अजय कुमार सोनी

प्रीत

मीठेश निर्मोही

रसोई

कमल किशोर पिपलवा

काल अर आज

ज़ेबा रशीद

बाळपणो

कल्याण गौतम

क्यूं

हरीश हैरी

पणिहारी

गजेन्द्र कंवर चम्पावत

पतियारो

शिवराज भारतीय

रळकायोड़ा मोती

मेघराज मुकुल

जिन्दगी

रामस्वरूप ‘परेश’

लिछमी

हरीश हैरी

मनचायी मौत

सत्येन जोशी

कीड़ी

अशोक परिहार 'उदय'

हाथ

कालू खां

ओळख

कुमार अजय

बाबो अर जुद्ध

भानसिंह शेखावत ‘मरूधर’

पाणी

संजू श्रीमाली