अपणायत पर कवितावां

मिनखीचारै सबद रै ओळै-दोळै

रौ ओ सबद आपरै मांयां एक आत्मिक रिस्तौ ले'न चालै जिणनै आपणौ लोक 'अपणायत'कैवै। अठै संकलित रचनावां अपणायत सूं जुड़ियोड़ी है।

कविता376

आग

हरीश हैरी

हेत प्रेम अपणायत में

श्रवण दान शून्य

धरम री बहन

देवीलाल महिया

पोती

हरीश हैरी

तूं

सत्य पी. गंगानगर

मिजाज

कैलाश मंडेला

धरती रो हेलो

मेघराज मुकुल

अेक और सदी

हरदान हर्ष

पत राखै पोतियौ

भंवरलाल सुथार

म्हारौ भोळी जीवड़ौ

प्रेमजी ‘प्रेम’

जिनावर अर मिनख

रामस्वरूप ‘परेश’

बाप

पुरुषोत्तम छंगाणी

यादां रो अड़ाव

कृष्ण बृहस्पति

सावणिये रा लोर

सोनी सांवरमल

सोळमौ सावण

शिव 'मृदुल'

हवा री तासीर

भंवर भादानी

हेलो

अशोक परिहार 'उदय'

मां

मंजू किशोर 'रश्मि'

दरद रा डूँगर

नन्दकिशोर चतुर्वेदी

कविता रो मारग

गजेन्द्र कंवर चम्पावत

बधतो आंतरो

नंद भारद्वाज

कोरा कागदां में कोरो प्रेम

कमल सिंह सुल्ताना

लूण रो खार

मीठालाल खत्री

मायतां री सीख

हनुमान प्रसाद 'बिरकाळी'

रिस्तो

शिवचरण सेन ‘शिवा’

मिरग तिसणा

वाज़िद हसन काजी

औ बिजौगण

अस्त अली खां मलकांण

हे! हरियाळा रूंखड़ा

कमल सिंह सुल्ताना

घर

संजू श्रीमाली

डाकी दायजो

कान्ह महर्षि

ओ परेम

गौरीशंकर निमिवाळ

प्रेम सनैव

बसन्ती पंवार

धरती रो काया कलप

सत्येन जोशी

थारी सूरत की सीपड्यां मं

मंजू किशोर 'रश्मि'

सतजुग

रामेश्वर दयाल श्रीमाली

भरकी

मंजू किशोर 'रश्मि'

मरुधर महिमा

कृष्णपाल सिंह राखी

आदमी नै बईरु

दीपिका दीक्षित

मन नै मारण रो उपाव

प्रिया शर्मा

काळ बहेलियो

नन्दकिशोर चतुर्वेदी

अबकी बेळा

कालू खां

सुतन्तर नागरिक

कमर मेवाड़ी

चिड़कली रा तीन सुवाल

अशोक परिहार 'उदय'

जातरा

सोनाली सुथार

उडीक

थानेश्वर शर्मा

कुदरत रौ मिनख

शंभुदान मेहडू

कठै सूं लावू?

सिया चौधरी

मणका

शैलेन्द्र उपाध्याय

मिनख रा चाळा

इन्द्रा व्यास