अपणायत पर कवितावां

मिनखीचारै सबद रै ओळै-दोळै

रौ ओ सबद आपरै मांयां एक आत्मिक रिस्तौ ले'न चालै जिणनै आपणौ लोक 'अपणायत'कैवै। अठै संकलित रचनावां अपणायत सूं जुड़ियोड़ी है।

कविता397

हेत प्रेम अपणायत में

श्रवण दान शून्य

आग

हरीश हैरी

अैरण बूझै रै घण बीर नै

सत्यप्रकाश जोशी

मिजाज

कैलाश मंडेला

पोती

हरीश हैरी

धरम री बहन

देवीलाल महिया

दीठ रो फरक

आरती छंगाणी

पाछा चालो खेत में

विमला महरिया 'मौज'

तूं

सत्य पी. गंगानगर

थारो प्रेम

नन्दकिशोर चतुर्वेदी

वा पीळौड़ी परभात

नाथूसिंह इंदा

जड़

ओम अंकुर

अरदास

अर्जुन अरविन्द

लुगायां

कमल किशोर पिपलवा

झील रो पाणी

रमेश मयंक

पवितर प्रीत

नरेंद्र व्यास

ममता रा मोती बांटो

त्रिलोक गोयल

टाबरपणैं री खोज

शिवराज भारतीय

कलार

अशोक जोशी ‘क्रांत’

कळां भखै मिनखपणों

इन्द्रा व्यास

अखबार

किशन ‘प्रणय’

रेत में सरजीवण आस

प्रेम शर्मा

आस

अर्जुन अरविन्द

औ जीवण जीणो पड़सी

अवन्तिका तूनवाल

अेकलो क्रिसन

हलीम ‘आईना’

किण रो दोस?

रामनरेश सोनी

मुमतांज रौ मोह

नारायण सिंह भाटी

रेचन

विनीता शर्मा

प्रेम कविता

अनिल अबूझ

अनंत जात्रा

कृष्ण बृहस्पति

पिऊ पियै दारूह

देवकर्ण सिंह

रेत

प्रेम शर्मा

आज रौ मिनख

विनोद सोमानी 'हंस'

बस्ती रो बदळाव

शिवराज छंगाणी

पिछाण

सुनील कुमार

पा’ड़, जड़ नी है

वासु आचार्य

पोथी रा पानां

दीपचन्द सुथार

परभाती

कल्याणसिंह राजावत

अतीत री छत सूं

नन्दकिशोर चतुर्वेदी

ऊंडी-दीठ

अस्त अली खां मलकांण

मौत रो पर्यायवाची

मेघराज मुकुल

ढळता मोती

महेंद्र मोदी

हथाळ्यां री मुळक

रेणुका व्यास 'नीलम'

कुबोली

अस्त अली खां मलकांण

हेत रो हींडौ

कृष्णा जाखड़

मुरधर रा हीरा

अस्त अली खां मलकांण