अपणायत पर कवितावां

मिनखीचारै सबद रै ओळै-दोळै

रौ ओ सबद आपरै मांयां एक आत्मिक रिस्तौ ले'न चालै जिणनै आपणौ लोक 'अपणायत'कैवै। अठै संकलित रचनावां अपणायत सूं जुड़ियोड़ी है।

कविता396

हेत प्रेम अपणायत में

श्रवण दान शून्य

आग

हरीश हैरी

तूं

सत्य पी. गंगानगर

मिजाज

कैलाश मंडेला

धरम री बहन

देवीलाल महिया

पाछा चालो खेत में

विमला महरिया 'मौज'

पोती

हरीश हैरी

दीठ रो फरक

आरती छंगाणी

पा’ड़, जड़ नी है

वासु आचार्य

पोथी रा पानां

दीपचन्द सुथार

परभाती

कल्याणसिंह राजावत

अतीत री छत सूं

नन्दकिशोर चतुर्वेदी

ऊंडी-दीठ

अस्त अली खां मलकांण

मौत रो पर्यायवाची

मेघराज मुकुल

ढळता मोती

महेंद्र मोदी

हथाळ्यां री मुळक

रेणुका व्यास 'नीलम'

कुबोली

अस्त अली खां मलकांण

हेत रो हींडौ

कृष्णा जाखड़

मुरधर रा हीरा

अस्त अली खां मलकांण

हिसाब

रामनाथ कमलाकर

गोभू

विश्वम्भरप्रसाद शर्मा ‘विद्यार्थी’

साथ

प्रदीप भट्ट

डाकियो

रामनिवास सोनी

असल बात

सुधीर राखेचा

कांमेतण

चन्द्र प्रकाश देवल

म्हारै माथै छात

धनपत स्वामी

जाग्या जी करसाण

रामदयाल मेहरा

राखी

रघुराजसिंह हाड़ा

तूं लागै घणी रूपाळी

छैलूदान चारण 'छैल'

मिलण

पूजाश्री

जूनी बातां रा जूना ऐहनाण

भवानीसिंह राठौड़ 'भावुक’

दूजी लहर

रमेश मयंक

अनंत जात्रा

कृष्ण बृहस्पति

पिऊ पियै दारूह

देवकर्ण सिंह

रेत

प्रेम शर्मा

आज रौ मिनख

विनोद सोमानी 'हंस'

बस्ती रो बदळाव

शिवराज छंगाणी

पिछाण

सुनील कुमार

अैरण बूझै रै घण बीर नै

सत्यप्रकाश जोशी

थारो प्रेम

नन्दकिशोर चतुर्वेदी

वा पीळौड़ी परभात

नाथूसिंह इंदा

जड़

ओम अंकुर

अरदास

अर्जुन अरविन्द

लुगायां

कमल किशोर पिपलवा

झील रो पाणी

रमेश मयंक