अपणायत पर कवितावां

मिनखीचारै सबद रै ओळै-दोळै

रौ ओ सबद आपरै मांयां एक आत्मिक रिस्तौ ले'न चालै जिणनै आपणौ लोक 'अपणायत'कैवै। अठै संकलित रचनावां अपणायत सूं जुड़ियोड़ी है।

कविता294

हेत प्रेम अपणायत में

श्रवण दान शून्य

आग

हरीश हैरी

पोती

हरीश हैरी

म्हैं सोचूं

वाज़िद हसन काजी

रिस्तां री बंधी

मनोज पुरोहित 'अनंत'

सबदां री खेती

मोनिका शर्मा

जमानो

निशान्त

परचार

भवानीसिंह राठौड़ 'भावुक’

परकत इच्छा

नन्दकिशोर चतुर्वेदी

खेजड़ो

तोगाराम गोदारा

इंदर धणख

सीमा भाटी

पिताजी

अंकिता पुरोहित

कांई थांको नांव

सतीश गोल्याण

धरम री बहन

देवीलाल महिया

जुड़बो

जितेन्द्र निर्मोही

काळ रा तीन ठांव

नन्दकिशोर चतुर्वेदी

नुवोपण

विनोद सोमानी 'हंस'

दीयाळी

ओमदत्त जोशी

संवेदणा

दुष्यन्त जोशी

अनंत जात्रा

कृष्ण बृहस्पति

डांखळा

शक्ति प्रकाश माथुर

रेत

प्रेम शर्मा

आज रौ मिनख

विनोद सोमानी 'हंस'

बस्ती रो बदळाव

शिवराज छंगाणी

पिछाण

सुनील कुमार

अैरण बूझै रै घण बीर नै

सत्यप्रकाश जोशी

थारो प्रेम

नन्दकिशोर चतुर्वेदी

वा पीळौड़ी परभात

नाथूसिंह इंदा

जड़

ओम अंकुर

लुगायां

कमल किशोर पिपलवा

पवितर प्रीत

नरेंद्र व्यास

टाबरपणैं री खोज

शिवराज भारतीय

कलार

अशोक जोशी ‘क्रांत’

अखबार

किशन ‘प्रणय’

रेत में सरजीवण आस

प्रेम शर्मा

औ जीवण जीणो पड़सी

अवन्तिका तूनवाल

किण रो दोस?

रामनरेश सोनी

मुमतांज रौ मोह

नारायण सिंह भाटी

प्रेम कविता

अनिल अबूझ

पा’ड़, जड़ नी है

वासु आचार्य

अतीत री छत सूं

नन्दकिशोर चतुर्वेदी

मौत रो पर्यायवाची

मेघराज मुकुल

ढळता मोती

महेंद्र मोदी

हथाळ्यां री मुळक

रेणुका व्यास 'नीलम'

हेत रो हींडौ

कृष्णा जाखड़