अपणायत पर कवितावां

मिनखीचारै सबद रै ओळै-दोळै

रौ ओ सबद आपरै मांयां एक आत्मिक रिस्तौ ले'न चालै जिणनै आपणौ लोक 'अपणायत'कैवै। अठै संकलित रचनावां अपणायत सूं जुड़ियोड़ी है।

कविता378

आग

हरीश हैरी

हेत प्रेम अपणायत में

श्रवण दान शून्य

तूं

सत्य पी. गंगानगर

मिजाज

कैलाश मंडेला

पोती

हरीश हैरी

दीठ रो फरक

आरती छंगाणी

धरम री बहन

देवीलाल महिया

मिनख अर कागलो

कैलाश मंडेला

चोरी करी पण मै चोर कोनी

अवन्तिका तूनवाल

बापूजी

मोनिका शर्मा

माटी रो खजानौ

शंकरलाल मीणा

दोजक

बंशी यथार्थ

बा

थानेश्वर शर्मा

बुणगट

भगवती लाल व्यास

हवा आग अर पाणी

ज़ेबा रशीद

थे साहित्यकार हो!

महेन्द्रसिंघ महलान

बात कठे

कृष्णा आचार्य

जोहड़ो

हरीश हैरी

नाणा

विजय गिरि गोस्वामी 'काव्यदीप'

रुठयो इन्दर

श्यामसुन्दर ‘श्रीपत’

थांरै बिना

कृष्णा आचार्य

सीट मिलेगी प्लीज।

मदन गोपाल लढ़ा

बांध आयो तागो

आशीष पुरोहित

घर

अशोक परिहार 'उदय'

पिछाण

कैलाश मंडेला

सूरज-उगाळी

गजेन्द्र कंवर चम्पावत

धूळ री जाजम

ओम पुरोहित ‘कागद’

सुराज रै खांध

कृष्ण बिश्नोई

ओ कुण लुक-छिप आवै

भुवनेश प्रकाशन, बीकानेर

आस

मनमीत सोनी

उपज

मोड़सिंह बल्ला ‘मृगेन्द्र’

ओ जमारो

हरि प्रसाद पारीक

आपरी मातृभाषा

मूळचंद प्राणेश

बिरहण

भवानीसिंह राठौड़ 'भावुक’

मोट्यारां

नंदकिशोर 'निर्झर'

घर

हनुमान प्रसाद 'बिरकाळी'

प्रीत रो प्रहलाद

वत्सला पांडे

खेजड़ी

अशोक परिहार 'उदय'

आ तो होवणी ई ही

देवकरण जोशी 'दीपक'

मा जद तू ही

ओम पुरोहित ‘कागद’

बाळपणों

अजय कुमार सोनी