अपणायत पर ग़ज़ल

मिनखीचारै सबद रै ओळै-दोळै

रौ ओ सबद आपरै मांयां एक आत्मिक रिस्तौ ले'न चालै जिणनै आपणौ लोक 'अपणायत'कैवै। अठै संकलित रचनावां अपणायत सूं जुड़ियोड़ी है।

ग़ज़ल22

बचता रीज्यो

प्रेमजी ‘प्रेम’

बूरो मत ना मान जो

अरविन्द चूरुवी

तकदीरां री बातां अै

अशोक जोशी ‘क्रांत’

धन रा लोभी बात बदळ दी,

श्रवण दान शून्य

म्हारै भावै रोटी खाव

मनोहरलाल गोयल

चंदणिया खसबू

मालचन्द्र ‘कमल’

मत चिलकावै ठाठ भायला

जयकुमार ‘रुसवा’

कठै-कठै

रामेश्वर दयाल श्रीमाली

करमां में रेख क्यूं

लालदास 'राकेश'

मरुवो

सत्य पी. गंगानगर

थाळी-थाळी निपटगी खीर

अशोक जोशी ‘क्रांत’

मोहबत री बातां, मत कर

कुंदन सिंह 'सजल'