अपणायत पर सोरठा

मिनखीचारै सबद रै ओळै-दोळै

रौ ओ सबद आपरै मांयां एक आत्मिक रिस्तौ ले'न चालै जिणनै आपणौ लोक 'अपणायत'कैवै। अठै संकलित रचनावां अपणायत सूं जुड़ियोड़ी है।

सोरठा3

सूतां सुपनै आई

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

तूं बीछड़ियौ त्यार

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

पंड मै घणौ पियार,

रायसिंह सांदू