अपणायत पर कवित्त

मिनखीचारै सबद रै ओळै-दोळै

रौ ओ सबद आपरै मांयां एक आत्मिक रिस्तौ ले'न चालै जिणनै आपणौ लोक 'अपणायत'कैवै। अठै संकलित रचनावां अपणायत सूं जुड़ियोड़ी है।

कवित्त4

उमटी घनघोर घटा मन की

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

कोटड़ी का कवित्त

कमल सिंह सुल्ताना