अपणायत पर मुक्तक

मिनखीचारै सबद रै ओळै-दोळै

रौ ओ सबद आपरै मांयां एक आत्मिक रिस्तौ ले'न चालै जिणनै आपणौ लोक 'अपणायत'कैवै। अठै संकलित रचनावां अपणायत सूं जुड़ियोड़ी है।

मुक्तक5

ब्याळू कर जुग रो भागीरथ

भगवती लाल व्यास

इण धरती री भोळी मायड़

भगवती लाल व्यास

रात पाछली आंगण-आंगण

भगवती लाल व्यास