मिनख री ओळख नै

अंवेरतौ पोतियौ,

बांधै नर कर खांत

उळझिया आंटा

सुळझाय नै।

भांत-भंतीला अर रंग-रंगीला

हुवै पोतिया

बांधीजै केई तरां रा पेच

सीस री सोभा बधावण

अर

हरेक जात धरम अर

पंथां रा न्यारा-न्यारा पोतिया

जिका उणरी ओळख

कराय दे छिन में।

इतिहासू पानां सूं पतांण पड़ै

आं पोतियां री महताऊ ठौड़

केई कुरब दिराया आं पोतियां

केई बार पागड़ी बदळ

भाई बणाया आं पोतियां।

अबखी आडा आवै

घणाज अै पोतिया

पांणी लेवौ सींच

अरियां बांधौ भळै

पोळां भलीज रुखाळता

अर

खोल्या कइयक बजर किंवाड़

भेटी भिड़ाय नै।

पत राखै पोतियौ

भरी सभा मांय

गुनाह माफ कराय

खार-बैर भांग नै

मिनख री मरजाद राखै

अै पोतिया।

अर हमै

हेलमेट री गरज साजै

अै पोतिया

फटफटियौ चलावतां

पुलिस आळा चालान

नीं काटै पोतियां वाळां रौ।

स्रोत
  • सिरजक : भंवरलाल सुथार ,
  • प्रकाशक : कवि रै हाथां चुणियोड़ी
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