विश्वास पर कवितावां

बाथां में भूगोल लियां

मिनखां अर जीवां नै भरोसे माथै बड़ो भरोसो है। भरोसे माथै भीड़ भागै अर भरोसो ई जीव रौ आधार है। अठै प्रस्तुत रचना-संग्रै भरोसे नै लेय'र रचियोड़ो है।

कविता346

प्रीत मंडाण

सुरेश कुमार डूडी

चंवरी

मेघराज मुकुल

स्वाद

आईदान सिंह भाटी

अेकला बळै

आशीष बिहानी

रूंखां में भगवान

अमर सिंह राजपुरोहित

घर

प्रवीण सुथार

पतियारौ

गजेसिंह राजपुरोहित

दीठ रो फरक

आरती छंगाणी

पाछा चालो खेत में

विमला महरिया 'मौज'

म्हारी उमर

रामाराम चौधरी

करमां री लकीरां नै

गणेशीलाल व्यास 'उस्ताद'

म्हूं के बोलूं

अखिलेश्वर

धोरै री ढाळ माथै भासा

आईदान सिंह भाटी

डंकै री चोट

जयनारायण व्यास

व्हां

किशन ‘प्रणय’

आ बैठ बात करां - 3

रामस्वरूप किसान

रचाव

राजूराम बिजारणियां

हुवै रंग हजार

सांवर दइया

ओ जमारो

हरि प्रसाद पारीक

विस्वास है

पारस अरोड़ा

चांद सैलाणी

प्रेमलता जैन

सहीद री व्यथा

फारूक़ आफरीदी

परिणाम मिळैला

जेठानंद पंवार

बाळपणों

अजय कुमार सोनी

काल अर आज

ज़ेबा रशीद

आस इणी में

कमल रंगा

अैलान

सुधीर राखेचा

सुवाल

दीनदयाल शर्मा

मैं कांईं करूं?

खिज्रो सुधांशु

मून रो म्यांनो

आशीष पुरोहित

खतरौ घणौ है दुणिया माय

शकुंतला अग्रवाल 'शकुन'

आंख्यां मांय हंसतौ गांव

गौरीशंकर निमिवाळ

नीसांणी

ठाकुर प्रेमसिंह ऊदावत

माँ रा सपना

राजदीप सिंह इन्दा

दुनियादारी

नन्दकिशोर चतुर्वेदी

तीन कवितावां

जबरनाथ पुरोहित

भरोसो

सीमा पारीक

नादाधींन जगत

राजेश कुमार व्यास

सहारो

अंकिता पुरोहित

सड़क

सीमा पारीक

अेक बीजै सूं

कमल रंगा

रूपा बावळी

रामदयाल मेहरा

चिड़कली

कुमार अजय

इसक

ज़ेबा रशीद

म्हारा छैल

रामदयाल मेहरा