विश्वास पर कवितावां

बाथां में भूगोल लियां

मिनखां अर जीवां नै भरोसे माथै बड़ो भरोसो है। भरोसे माथै भीड़ भागै अर भरोसो ई जीव रौ आधार है। अठै प्रस्तुत रचना-संग्रै भरोसे नै लेय'र रचियोड़ो है।

कविता324

प्रीत मंडाण

सुरेश कुमार डूडी

चंवरी

मेघराज मुकुल

स्वाद

आईदान सिंह भाटी

अेकला बळै

आशीष बिहानी

घर

प्रवीण सुथार

रूंखां में भगवान

अमर सिंह राजपुरोहित

डंकै री चोट

जयनारायण व्यास

म्हारी उमर

रामाराम चौधरी

म्हूं के बोलूं

अखिलेश्वर

पतियारौ

गजेसिंह राजपुरोहित

धोरै री ढाळ माथै भासा

आईदान सिंह भाटी

व्हां

किशन ‘प्रणय’

आस इणी में

कमल रंगा

अैलान

सुधीर राखेचा

सुवाल

दीनदयाल शर्मा

मैं कांईं करूं?

खिज्रो सुधांशु

मून रो म्यांनो

आशीष पुरोहित

खतरौ घणौ है दुणिया माय

शकुंतला अग्रवाल 'शकुन'

आंख्यां मांय हंसतौ गांव

गौरीशंकर निमिवाळ

नीसांणी

ठाकुर प्रेमसिंह ऊदावत

माँ रा सपना

राजदीप सिंह इन्दा

दुनियादारी

नन्दकिशोर चतुर्वेदी

तीन कवितावां

जबरनाथ पुरोहित

विस्वास है

पारस अरोड़ा

चांद सैलाणी

प्रेमलता जैन

सहीद री व्यथा

फारूक़ आफरीदी

परिणाम मिळैला

जेठानंद पंवार

बाळपणों

अजय कुमार सोनी

काल अर आज

ज़ेबा रशीद

ओळखाण

इरशाद अज़ीज़

पणिहारी

गजेन्द्र कंवर चम्पावत

राजपूत रो डावड़ो

भुवनेश प्रकाशन, बीकानेर

बादळी

महेन्द्र यादव

घूँघट

ओम बटाऊ

गांव में

मनमीत सोनी

ओळख

कुमार अजय

बाबो अर जुद्ध

भानसिंह शेखावत ‘मरूधर’

पाणी

संजू श्रीमाली

भरोसैमंद आखर

नंद भारद्वाज

बीज

रमेश मयंक

बात री सरुआत

पारस अरोड़ा

सांच अर झूठ

चैन सिंह शेखावत

काळ / सुकाळ

छगनलाल व्यास

बिलोवणो

पूनमचंद गोदारा

म्हूं लिखूंला

रामकुमार भाम्भू

सूखी नदी

रमेश मयंक