विश्वास पर कवितावां

बाथां में भूगोल लियां

मिनखां अर जीवां नै भरोसे माथै बड़ो भरोसो है। भरोसे माथै भीड़ भागै अर भरोसो ई जीव रौ आधार है। अठै प्रस्तुत रचना-संग्रै भरोसे नै लेय'र रचियोड़ो है।

कविता348

ई साल बी-बी दिनई

कृष्ण बृहस्पति

रिस्तां री बंधी

मनोज पुरोहित 'अनंत'

अणभव रौ सार

नंद भारद्वाज

पतियारौ

गजेसिंह राजपुरोहित

झूठौ बणज

प्रेमजी ‘प्रेम’

भांण-भाई

रामनिरंजन शर्मा ‘ठिमाऊ’

कम्पोज

वासुदेव चतुर्वेदी

मां अर बगसो

किरण बाला 'किरन'

उठाया दोनूं हाथ

प्रियंका भट्ट

परकत इच्छा

नन्दकिशोर चतुर्वेदी

जागती-जोत

बुद्धरंजन शर्मा

घर

प्रवीण सुथार

म्हूं लिखूंला

रामकुमार भाम्भू

सूखी नदी

रमेश मयंक

सिंदूर

अजन्ता चौधरी

बदलो

हरदान हर्ष

भरोसो

अनिल अबूझ

दीठ रो फरक

आरती छंगाणी

सोधूं हूं

गिरधारी सिंह राजावत

किरसो

संजू श्रीमाली

दादी रो गणित

कृष्ण कुमार स्वामी

डगळियै-डगळिये देव

बनवारीलाल अग्रवाल

प्रार्थना

जॉन गोल्सवर्दी

मिनख-मिनख री मार

कपिलदेव आर्य

चांद रो चितराम

चैन सिंह शेखावत

भणाई रो बळ

जेठानंद पंवार

भींत

महेंद्र मोदी

कदमताळ

गोरधन सिंह शेखावत

बस! इत्तो ई चावै नारी

मीनाक्षी पारीक

होसी थारी-म्हारी बातां

दशरथ कुमार सोलंकी

व कुण है

चंद्रशेखर अरोड़ा

अंध विश्वास

रतन ‘राहगीर’

सूरज टंटोळता रह्या

त्रिलोक गोयल

एक मांदो गांव’र मैं

रामस्वरूप ‘परेश’

प्रीत मंडाण

सुरेश कुमार डूडी

रूंखां में भगवान

अमर सिंह राजपुरोहित

काळ / सुकाळ

छगनलाल व्यास

बिलोवणो

पूनमचंद गोदारा

म्हारी उमर

रामाराम चौधरी

आस इणी में

कमल रंगा

अैलान

सुधीर राखेचा

सुवाल

दीनदयाल शर्मा

मैं कांईं करूं?

खिज्रो सुधांशु

मून रो म्यांनो

आशीष पुरोहित

खतरौ घणौ है दुणिया माय

शकुंतला अग्रवाल 'शकुन'

आंख्यां मांय हंसतौ गांव

गौरीशंकर निमिवाळ