विडरूपता पर बंतळ
सामाजिक जीवण में आपां
रै असवाड़ै-पसवाड़ै अेड़ी केई विसमतावां हुवै जिणा सूं मिनख रौ जीवणौ, न जीवणै जेड़ौ हो ज्यावै। अठै संकलित रचनावां ई विसै सूं ई जुड़ियोड़ी है।
रै असवाड़ै-पसवाड़ै अेड़ी केई विसमतावां हुवै जिणा सूं मिनख रौ जीवणौ, न जीवणै जेड़ौ हो ज्यावै। अठै संकलित रचनावां ई विसै सूं ई जुड़ियोड़ी है।
राधाकिशन चांदवाणी : सबसूं पैला ‘माणक’ रै पाठकां नै आपरौ कीं परिचय दिरावौ? हरीश भादाणी : म्हारौ जनम बीकानेर में ब्राह्मण (भादाणी) परिवार में होयौ। अर म्हारी शिक्षा ई बीकानेर में हुई। सरूपोत री शिक्षा पूरी नीं कर सक्यौ। इणरौ कारण म्हारी घरू परिस्थितियां
राणी लक्ष्मीकुमारी चूंडावत राजस्थानी साहित्य रौ ठावकौ अर ख्यात नांव। सन् 1916 में देवगढ़ (उदयपुर) में जनम्या राणीजी साहित्य अर राजनीत दोनूं ठौड़ां राजस्थानी नारी चेतना अर ओळख रै महताऊ पखां माथै समाज नैं चेतावता थकां जोरदार दखल दीवी। फ्रांसिस टैफ्ट रै
म्हारौ जलम 15 अप्रैल रै दिन जयपुर शहर में हुयौ। वठै री सरजमीं रै माथै ई म्हैं होस संभाळ्यौ। बठै गोडाळियां चालणौ सीख्यौ, अर बठै ई मां-पा-बा इत्याद सबद कैवणौ सीख्यौ। बठै ई पढ-लिख’र परवांन चढ्यौ। रथखांनै रै नजदीक हवाम्हैल रै सामनै री स्कूल में अंग्रेजी