विडरूपता पर गीत

सामाजिक जीवण में आपां

रै असवाड़ै-पसवाड़ै अेड़ी केई विसमतावां हुवै जिणा सूं मिनख रौ जीवणौ, न जीवणै जेड़ौ हो ज्यावै। अठै संकलित रचनावां ई विसै सूं ई जुड़ियोड़ी है।

गीत28

बाबा थारी बकरियां

मोहम्मद सदीक

काला बाजार

श्रीनाथ मोदी

डर सूं डरो

मोहम्मद सदीक

वोट का महत्व

श्रीनाथ मोदी

पर्यावरण गीत

उपेन्द्र अणु

बाड़ खेत नै खावै है

मोहम्मद सदीक

नूवां अरथ

मोहम्मद सदीक

रामल्यो

मुकुट मणिराज

भ्रष्टाचारी

श्रीनाथ मोदी

जल्दी चेतजो

श्रीनाथ मोदी

भगवान भलो करसी थारो

किशोर कल्पनाकान्त

बैरण बांसलड़ी

कन्हैयालाल सेठिया

बटोई

किशन लाल वर्मा

जुग

शंकरलाल स्वामी

तामझामसा

मोहम्मद सदीक

कबूतराँ को जोड़ो

रघुराजसिंह हाड़ा

गीत : धन-धीणे रो

ओंकार श्री

जीवण-रस री धार में

कानदान ‘कल्पित’

ये ओरां वाळा फोड़ा

प्रेमजी ‘प्रेम’

मांडो अरटियो

श्रीनाथ मोदी

अेक बटावू भटकै

किशोर कल्पनाकान्त

नुंवली गीता रो ज्ञान

किशोर कल्पनाकान्त

रुत रो गीत

चंद्रकुमार ‘सुकुमार’