विडरूपता पर डांखळा

सामाजिक जीवण में आपां

रै असवाड़ै-पसवाड़ै अेड़ी केई विसमतावां हुवै जिणा सूं मिनख रौ जीवणौ, न जीवणै जेड़ौ हो ज्यावै। अठै संकलित रचनावां ई विसै सूं ई जुड़ियोड़ी है।

डांखळा3

अर्‌जीनवीस होया करतो

विद्यासागर शर्मा

गुरूजी नै आ'र बोल्यो

विद्यासागर शर्मा