विडरूपता पर कवितावां

सामाजिक जीवण में आपां

रै असवाड़ै-पसवाड़ै अेड़ी केई विसमतावां हुवै जिणा सूं मिनख रौ जीवणौ, न जीवणै जेड़ौ हो ज्यावै। अठै संकलित रचनावां ई विसै सूं ई जुड़ियोड़ी है।

कविता403

लालू दादो

चन्द्र प्रकाश देवल

काळ

मणि मधुकर

मजूर रौ दिन

अर्जुनदेव चारण

जे म्हैं आदमी होऊँ

विमला महरिया 'मौज'

सबद कोस

अर्जुनदेव चारण

इण तरै रा सून्याड़ में

भगवती लाल व्यास

सातवौं फेरौ

अर्जुनदेव चारण

थूं कद जीवती ही मां

अर्जुनदेव चारण

फाटोड़ी जेब

पारस अरोड़ा

आत्महंता

त्रिभुवन

नंग धड़ंग अरावळी

कन्हैयालाल सेठिया

कांमणी

नंद भारद्वाज

घर कठै है

अर्जुनदेव चारण

बंटवारो

भगवती लाल व्यास

म्हूँ जनता हूँ

भगवती लाल व्यास

आम आदमी

रामनिवास सोनी

जुझारू रो सवाल

रतन ‘राहगीर’

बैरण होळी आगी

रघुराजसिंह हाड़ा

दूजौ जीवण

कैसियानो रिकार्डो

किता लोग अंया का है

बनवारीलाल अग्रवाल

थै जाणो हो

सांवर दइया

थूं कांई कैवैलौ?

जोसेफ सीमोन कॉटर जूनियर

सवाग

सत्यप्रकाश जोशी

रगत और प्राण

भागीरथ मेघवाल

ज्ञान-विज्ञान

केसरी कान्त शर्मा

टूटोड़ी भींत बता...

चंद्रशेखर अरोड़ा

आजादी

हरिलाल अग्रवाल

पख-विपख

श्याम महर्षि

नेता चालिसौ

ओम पुरोहित ‘कागद’

पेट री भूख

विक्रमसिंह गून्दोज

काळ

भगवान सैनी

भाग फूटयो ईमानदार निकळग्यो

लक्ष्मीनारायण रंगा

सरंग फाट जावैला

ब्रजमोहन सपूत

बीड़ी पीवै बावळा

केशव पथिक आचार्य

कसमूल आरती

सुमन बिस्सा

अगरबत्ती

मदन गोपाल लढ़ा

नेम प्लेट

रामजीलाल घोड़ेला 'भारती'

अेक ठहर्‌योड़ी दोपरी

गोरधन सिंह शेखावत

पाछो आव

रामस्वरूप ‘परेश’

मटको

जयकुमार ‘रुसवा’

कांच रै घर मांय

भगवती लाल व्यास

कऊ

प्रमिला शंकर

एक चोरंगी जिन्दगी

रामस्वरूप ‘परेश’

बापू रौ बिलम

रेवतदान चारण कल्पित