विडरूपता पर कवितावां

सामाजिक जीवण में आपां

रै असवाड़ै-पसवाड़ै अेड़ी केई विसमतावां हुवै जिणा सूं मिनख रौ जीवणौ, न जीवणै जेड़ौ हो ज्यावै। अठै संकलित रचनावां ई विसै सूं ई जुड़ियोड़ी है।

कविता461

लालू दादो

चन्द्र प्रकाश देवल

काळ

मणि मधुकर

मजूर रौ दिन

अर्जुनदेव चारण

बैरण होळी आगी

रघुराजसिंह हाड़ा

घर कठै है

अर्जुनदेव चारण

सातवौं फेरौ

अर्जुनदेव चारण

बंटवारो

भगवती लाल व्यास

फाटोड़ी जेब

पारस अरोड़ा

आत्महंता

त्रिभुवन

जे म्हैं आदमी होऊँ

विमला महरिया 'मौज'

सबद कोस

अर्जुनदेव चारण

इण तरै रा सून्याड़ में

भगवती लाल व्यास

नंग धड़ंग अरावळी

कन्हैयालाल सेठिया

थूं कद जीवती ही मां

अर्जुनदेव चारण

कांमणी

नंद भारद्वाज

म्हूँ जनता हूँ

भगवती लाल व्यास

लेबल

माणक तिवारी 'बन्धु'

आम आदमी

रामनिवास सोनी

जुझारू रो सवाल

रतन ‘राहगीर’

चीर-हरण

बद्रीदान गाडण

पतो छै

अम्बिका दत्त

पिक्चर पोस्टरकार्ड

मिक्लोश राद्नोती

बो

श्याम महर्षि

फूल अर गंध

भागीरथ मेघवाल

कुण जाणै?

स्वामी खुसाल नाथ

पख-विपख

श्याम महर्षि

नेता चालिसौ

ओम पुरोहित ‘कागद’

पेट री भूख

विक्रमसिंह गून्दोज

काळ

भगवान सैनी

भाग फूटयो ईमानदार निकळग्यो

लक्ष्मीनारायण रंगा

सरंग फाट जावैला

ब्रजमोहन सपूत

दूजौ जीवण

कैसियानो रिकार्डो

किता लोग अंया का है

बनवारीलाल अग्रवाल

थै जाणो हो

सांवर दइया

थूं कांई कैवैलौ?

जोसेफ सीमोन कॉटर जूनियर

बात

अम्बिका दत्त

सिड़िज्योड़ा होठ

कृष्ण बिश्नोई

मांय तौ नागा ई

सांवर दइया

चौफेर

मोहम्मद सदीक

नाग-निसरणी

शंकरसिंह राजपुरोहित

सांस्कृतिक चेतना

श्याम महर्षि

बुण रयी हूं अेक सरीर

गैब्रेला मिस्ट्राल

म्हां अपमानित

पारस अरोड़ा

अंतस

अमोलकचन्द जांगिड़

घणी खम्मां

मणि मधुकर