विडरूपता पर कवितावां

सामाजिक जीवण में आपां

रै असवाड़ै-पसवाड़ै अेड़ी केई विसमतावां हुवै जिणा सूं मिनख रौ जीवणौ, न जीवणै जेड़ौ हो ज्यावै। अठै संकलित रचनावां ई विसै सूं ई जुड़ियोड़ी है।

कविता293

मजूर रौ दिन

अर्जुनदेव चारण

काळ

मणि मधुकर

घर कठै है

अर्जुनदेव चारण

बंटवारो

भगवती लाल व्यास

आत्महंता

त्रिभुवन

फाटोड़ी जेब

पारस अरोड़ा

थूं कद जीवती ही मां

अर्जुनदेव चारण

जे म्हैं आदमी होऊँ

विमला महरिया 'मौज'

सबद कोस

अर्जुनदेव चारण

इण तरै रा सून्याड़ में

भगवती लाल व्यास

सातवौं फेरौ

अर्जुनदेव चारण

म्हूँ जनता हूँ

भगवती लाल व्यास

नंग धड़ंग अरावळी

कन्हैयालाल सेठिया

अेकली

मणि मधुकर

बातां मांयली बात

गुलाब चंद कोटड़िया

आँच ही आँच

मोहम्मद सदीक

मौसम री मार

पारस अरोड़ा

दिनूगै री गाड्यां

बरीस पास्तरनाक

सुळ सुळियो

मोहम्मद सदीक

आपां रै नांवै

सत्येन जोशी

आवणियो काल

गोविन्द शंकर कुरुप

आंख खोली जद सूं

बनवारीलाल अग्रवाल

जायसी री पीड़

सांवर दइया

प्यार रौ सनैसो

विनोद सोमानी 'हंस'

बाळपणो

कल्याण गौतम

अंतस रौ उणियारौ

नंद भारद्वाज

वन-महोच्छब

भगवती लाल व्यास

आं दिनां में

गोरधन सिंह शेखावत

निमित्त

सत्येन जोशी

तीजी रेख

अर्जुनदेव चारण

म्हे सब देखां

नन्दकिशोर चतुर्वेदी

मसाणा में लाडली

विमला महरिया 'मौज'

मृत्यु-बोध

पुरुषोत्तम छंगाणी

काळ/ अकाळ/ महाकाळ

रेवतदान चारण कल्पित

जीवण रौ ढंग

राजेन्द्र बोहरा

वै कुण है?

राजेन्द्र बोहरा

चेतौ

गोरधन सिंह शेखावत

क्रिस्णाकुमारी

अर्जुनदेव चारण

रातिंदो

गोरधन सिंह शेखावत

अछूत

प्रेमजी ‘प्रेम’

व्लादिमिर इलिच लेनिन

व्लादिमीर मायकोव्स्की