विडरूपता पर कवितावां

सामाजिक जीवण में आपां

रै असवाड़ै-पसवाड़ै अेड़ी केई विसमतावां हुवै जिणा सूं मिनख रौ जीवणौ, न जीवणै जेड़ौ हो ज्यावै। अठै संकलित रचनावां ई विसै सूं ई जुड़ियोड़ी है।

कविता424

लालू दादो

चन्द्र प्रकाश देवल

काळ

मणि मधुकर

मजूर रौ दिन

अर्जुनदेव चारण

घर कठै है

अर्जुनदेव चारण

बंटवारो

भगवती लाल व्यास

जे म्हैं आदमी होऊँ

विमला महरिया 'मौज'

सबद कोस

अर्जुनदेव चारण

इण तरै रा सून्याड़ में

भगवती लाल व्यास

सातवौं फेरौ

अर्जुनदेव चारण

आत्महंता

त्रिभुवन

फाटोड़ी जेब

पारस अरोड़ा

थूं कद जीवती ही मां

अर्जुनदेव चारण

नंग धड़ंग अरावळी

कन्हैयालाल सेठिया

कांमणी

नंद भारद्वाज

म्हूँ जनता हूँ

भगवती लाल व्यास

अणूती रीत

ज्ञानसिंह चौहान ‘मोरपांख’

दूजौ घर

प्रमिला शंकर

वो भेजै थनै

अर्जुनदेव चारण

आपणी बात छ

कमला गोतम

उडीक

पारस अरोड़ा

रुखाळो

रतन ‘राहगीर’

गरब

मदनमोहन परिहार

दुरसंका

रफ़ाइल अलबर्ती

फरक दीठ रो

मदन गोपाल लढ़ा

गांव

गोरधन सिंह शेखावत

चीर-हरण

बद्रीदान गाडण

पिक्चर पोस्टरकार्ड

मिक्लोश राद्नोती

बो

श्याम महर्षि

फूल अर गंध

भागीरथ मेघवाल

कुण जाणै?

स्वामी खुसाल नाथ

म्हे तो प्रीत लुटाई अणहद

कल्याणसिंह राजावत

तूफांन

रेवतदान चारण कल्पित

आंसूड़ा

वासुदेव चतुर्वेदी

सफदर हासमी री मौत

गोरधन सिंह शेखावत

आगै अंधारौ

नंद भारद्वाज

अे दिवलै री जोत

किशोर कल्पनाकान्त

बीच आलां लोगां रौ बिलखणौ

हंस मैग्नस एनज़ेंसबर्गर

मां रौ नांव

महेश मोड़जी

सुवाद

मणि मधुकर

रुधन

प्रभात

किता लोग अंया का है

बनवारीलाल अग्रवाल

थै जाणो हो

सांवर दइया

थूं कांई कैवैलौ?

जोसेफ सीमोन कॉटर जूनियर

सिड़िज्योड़ा होठ

कृष्ण बिश्नोई

मांय तौ नागा ई

सांवर दइया