विडरूपता पर कवितावां

सामाजिक जीवण में आपां

रै असवाड़ै-पसवाड़ै अेड़ी केई विसमतावां हुवै जिणा सूं मिनख रौ जीवणौ, न जीवणै जेड़ौ हो ज्यावै। अठै संकलित रचनावां ई विसै सूं ई जुड़ियोड़ी है।

कविता314

लालू दादो

चन्द्र प्रकाश देवल

काळ

मणि मधुकर

मजूर रौ दिन

अर्जुनदेव चारण

बंटवारो

भगवती लाल व्यास

घर कठै है

अर्जुनदेव चारण

फाटोड़ी जेब

पारस अरोड़ा

आत्महंता

त्रिभुवन

जे म्हैं आदमी होऊँ

विमला महरिया 'मौज'

सबद कोस

अर्जुनदेव चारण

इण तरै रा सून्याड़ में

भगवती लाल व्यास

सातवौं फेरौ

अर्जुनदेव चारण

थूं कद जीवती ही मां

अर्जुनदेव चारण

नंग धड़ंग अरावळी

कन्हैयालाल सेठिया

कांमणी

नंद भारद्वाज

म्हूँ जनता हूँ

भगवती लाल व्यास

मसाणा में लाडली

विमला महरिया 'मौज'

मृत्यु-बोध

पुरुषोत्तम छंगाणी

काळ/ अकाळ/ महाकाळ

रेवतदान चारण कल्पित

जीवण रौ ढंग

राजेन्द्र बोहरा

वै कुण है?

राजेन्द्र बोहरा

चेतौ

गोरधन सिंह शेखावत

क्रिस्णाकुमारी

अर्जुनदेव चारण

रातिंदो

गोरधन सिंह शेखावत

अछूत

प्रेमजी ‘प्रेम’

व्लादिमिर इलिच लेनिन

व्लादिमीर मायकोव्स्की

तीन हेली गीत

बी. एल. माली ‘अशान्त’

गरज़ गधा नै बाप कुहावै

रोशनलाल कटारिया

आज री नारी

रमेश मयंक

पनजी मारू

गोरधन सिंह शेखावत

पेड़

अर्जुनदान चारण

प्यार रौ सनैसो

विनोद सोमानी 'हंस'

बाळपणो

कल्याण गौतम

अंतस रौ उणियारौ

नंद भारद्वाज

वन-महोच्छब

भगवती लाल व्यास

आं दिनां में

गोरधन सिंह शेखावत

निमित्त

सत्येन जोशी

तीजी रेख

अर्जुनदेव चारण

म्हे सब देखां

नन्दकिशोर चतुर्वेदी

पिक्चर पोस्टरकार्ड

मिक्लोश राद्नोती

म्हे तो प्रीत लुटाई अणहद

कल्याणसिंह राजावत

तूफांन

रेवतदान चारण कल्पित