विडरूपता पर कवितावां

सामाजिक जीवण में आपां

रै असवाड़ै-पसवाड़ै अेड़ी केई विसमतावां हुवै जिणा सूं मिनख रौ जीवणौ, न जीवणै जेड़ौ हो ज्यावै। अठै संकलित रचनावां ई विसै सूं ई जुड़ियोड़ी है।

कविता462

मजूर रौ दिन

अर्जुनदेव चारण

लालू दादो

चन्द्र प्रकाश देवल

काळ

मणि मधुकर

जे म्हैं आदमी होऊँ

विमला महरिया 'मौज'

सबद कोस

अर्जुनदेव चारण

इण तरै रा सून्याड़ में

भगवती लाल व्यास

म्हूँ जनता हूँ

भगवती लाल व्यास

बंटवारो

भगवती लाल व्यास

फाटोड़ी जेब

पारस अरोड़ा

आत्महंता

त्रिभुवन

नंग धड़ंग अरावळी

कन्हैयालाल सेठिया

थूं कद जीवती ही मां

अर्जुनदेव चारण

कांमणी

नंद भारद्वाज

लेबल

माणक तिवारी 'बन्धु'

बैरण होळी आगी

रघुराजसिंह हाड़ा

घर कठै है

अर्जुनदेव चारण

सातवौं फेरौ

अर्जुनदेव चारण

बुलावो

गंगादास

सावचेत रैईजौ जायसी महाराज

शंकरसिंह राजपुरोहित

सवाग

सत्यप्रकाश जोशी

रगत और प्राण

भागीरथ मेघवाल

ज्ञान-विज्ञान

केसरी कान्त शर्मा

टूटोड़ी भींत बता...

चंद्रशेखर अरोड़ा

आजादी

हरिलाल अग्रवाल

म्हारो मनखपणो

गोविन्द हाँकला

अेवज

बरीस पास्तरनाक

उलटी वातां

मुरलीधर व्यास ‘राजस्थानी’

कद तांईं

गोरधन सिंह शेखावत

ज़िन्दगी

भगवती लाल व्यास

बेम्मार

मणि मधुकर

ढाल

भोगीलाल पाटीदार

अजलक नीं समझे

कविता किरण

बीड़ी पीवै बावळा

केशव पथिक आचार्य

कसमूल आरती

सुमन बिस्सा

अगरबत्ती

मदन गोपाल लढ़ा

नेम प्लेट

रामजीलाल घोड़ेला 'भारती'

नेग रौ जुग

विक्रमसिंह गून्दोज

अेक ठहर्‌योड़ी दोपरी

गोरधन सिंह शेखावत

देखो! ओ अंधारो

मंगत बादल

पाछो आव

रामस्वरूप ‘परेश’

आतम-निरभर

शंकरसिंह राजपुरोहित

मटको

जयकुमार ‘रुसवा’

कांच रै घर मांय

भगवती लाल व्यास

कऊ

प्रमिला शंकर