विडरूपता पर कवितावां

सामाजिक जीवण में आपां

रै असवाड़ै-पसवाड़ै अेड़ी केई विसमतावां हुवै जिणा सूं मिनख रौ जीवणौ, न जीवणै जेड़ौ हो ज्यावै। अठै संकलित रचनावां ई विसै सूं ई जुड़ियोड़ी है।

कविता446

लालू दादो

चन्द्र प्रकाश देवल

काळ

मणि मधुकर

मजूर रौ दिन

अर्जुनदेव चारण

नंग धड़ंग अरावळी

कन्हैयालाल सेठिया

कांमणी

नंद भारद्वाज

सातवौं फेरौ

अर्जुनदेव चारण

घर कठै है

अर्जुनदेव चारण

म्हूँ जनता हूँ

भगवती लाल व्यास

जे म्हैं आदमी होऊँ

विमला महरिया 'मौज'

सबद कोस

अर्जुनदेव चारण

इण तरै रा सून्याड़ में

भगवती लाल व्यास

बंटवारो

भगवती लाल व्यास

फाटोड़ी जेब

पारस अरोड़ा

आत्महंता

त्रिभुवन

थूं कद जीवती ही मां

अर्जुनदेव चारण

भड़ास

हरदान हर्ष

म्हारी आ लापरवाही

भागीरथसिंह भाग्य

घर

नीरज दइया

काल थे खुद

सांवर दइया

मरता-जींवता

बाबूलाल शर्मा

अमोघ ओखध

मगर चन्द्र दवे

अलीसन कोसे री मोत माथै

येवेजनी येव्तुसेंको

सरकारी साण्ड

रमेशचन्द्र शर्मा ‘इन्दु’

घोळ-मथोळ

महावीर जोशी

अमूझणी भर्‌या दिन

भगवती लाल व्यास

अध्यक्षता

राणुसिंह राजपुरोहित

म्हैं कुण?

श्याम महर्षि

अेक समिक्सक : कल्पना रौ

मंगेश पाडगांवकर

मानखै री पत

मोहम्मद सदीक

जोग

मणि मधुकर

पाड़ोसण

मणि मधुकर

म्हांरौ गांव

बस्तीमल सोलंकी भीम

म्हारो भायलो

रतन ‘राहगीर’

विश्वकप

रामजीलाल घोड़ेला 'भारती'

सुपनो क साच

प्रकाशदान चारण

डूंगरी न्हें बौली

भोगीलाल पाटीदार

कुरुक्षेत्र

प्रमिला शंकर

प्रेम अर जबर

सतीश छिम्पा

आपरा आलोचकां सूं

अलेक्जांदर त्वारदोवस्की

मुरझायोड़ो पल

गोरधन सिंह शेखावत

कुरसी

तारासिंह

फूलम-कथा

मणि मधुकर

सिध-जोगी

मणि मधुकर

बोवणी

पारस अरोड़ा

छैलो

भगवती प्रसाद चौधरी