विडरूपता पर कवितावां

सामाजिक जीवण में आपां

रै असवाड़ै-पसवाड़ै अेड़ी केई विसमतावां हुवै जिणा सूं मिनख रौ जीवणौ, न जीवणै जेड़ौ हो ज्यावै। अठै संकलित रचनावां ई विसै सूं ई जुड़ियोड़ी है।

कविता398

लालू दादो

चन्द्र प्रकाश देवल

काळ

मणि मधुकर

मजूर रौ दिन

अर्जुनदेव चारण

आत्महंता

त्रिभुवन

फाटोड़ी जेब

पारस अरोड़ा

थूं कद जीवती ही मां

अर्जुनदेव चारण

नंग धड़ंग अरावळी

कन्हैयालाल सेठिया

कांमणी

नंद भारद्वाज

घर कठै है

अर्जुनदेव चारण

बंटवारो

भगवती लाल व्यास

जे म्हैं आदमी होऊँ

विमला महरिया 'मौज'

सबद कोस

अर्जुनदेव चारण

इण तरै रा सून्याड़ में

भगवती लाल व्यास

सातवौं फेरौ

अर्जुनदेव चारण

म्हूँ जनता हूँ

भगवती लाल व्यास

अेकली

मणि मधुकर

पटवारी

रामजीलाल घोड़ेला 'भारती'

बातां मांयली बात

गुलाब चंद कोटड़िया

आँच ही आँच

मोहम्मद सदीक

मौसम री मार

पारस अरोड़ा

अभाव मूं

हरदान हर्ष

दिनूगै री गाड्यां

बरीस पास्तरनाक

सुळ सुळियो

मोहम्मद सदीक

आपां रै नांवै

सत्येन जोशी

छळ

हरदान हर्ष

प्यार रौ सनैसो

विनोद सोमानी 'हंस'

बाळपणो

कल्याण गौतम

अंतस रौ उणियारौ

नंद भारद्वाज

वन-महोच्छब

भगवती लाल व्यास

आं दिनां में

गोरधन सिंह शेखावत

निमित्त

सत्येन जोशी

दीदार

बद्रीदान गाडण

भेडां

मदन सैनी

तीजी रेख

अर्जुनदेव चारण

दीपक राग

किशोर कल्पनाकान्त

म्हे सब देखां

नन्दकिशोर चतुर्वेदी

निरमाण कै विनाश?

भागीरथ मेघवाल

फर्राटो

आर. सी. शर्मा ‘गोपाल’

मसाणा में लाडली

विमला महरिया 'मौज'

मृत्यु-बोध

पुरुषोत्तम छंगाणी

मैं

रतनलाल जोशी

प्रीत रै पाणै

सत्यनारायण इन्दौरिया

काळ/ अकाळ/ महाकाळ

रेवतदान चारण कल्पित