विडरूपता पर कवितावां

सामाजिक जीवण में आपां

रै असवाड़ै-पसवाड़ै अेड़ी केई विसमतावां हुवै जिणा सूं मिनख रौ जीवणौ, न जीवणै जेड़ौ हो ज्यावै। अठै संकलित रचनावां ई विसै सूं ई जुड़ियोड़ी है।

कविता348

लालू दादो

चन्द्र प्रकाश देवल

काळ

मणि मधुकर

मजूर रौ दिन

अर्जुनदेव चारण

बंटवारो

भगवती लाल व्यास

घर कठै है

अर्जुनदेव चारण

फाटोड़ी जेब

पारस अरोड़ा

आत्महंता

त्रिभुवन

जे म्हैं आदमी होऊँ

विमला महरिया 'मौज'

सबद कोस

अर्जुनदेव चारण

इण तरै रा सून्याड़ में

भगवती लाल व्यास

सातवौं फेरौ

अर्जुनदेव चारण

थूं कद जीवती ही मां

अर्जुनदेव चारण

नंग धड़ंग अरावळी

कन्हैयालाल सेठिया

कांमणी

नंद भारद्वाज

म्हूँ जनता हूँ

भगवती लाल व्यास

मसाणा में लाडली

विमला महरिया 'मौज'

प्यार रौ सनैसो

विनोद सोमानी 'हंस'

बाळपणो

कल्याण गौतम

अंतस रौ उणियारौ

नंद भारद्वाज

वन-महोच्छब

भगवती लाल व्यास

आं दिनां में

गोरधन सिंह शेखावत

निमित्त

सत्येन जोशी

दीदार

बद्रीदान गाडण

भेडां

मदन सैनी

तीजी रेख

अर्जुनदेव चारण

म्हे सब देखां

नन्दकिशोर चतुर्वेदी

चीर-हरण

बद्रीदान गाडण

पिक्चर पोस्टरकार्ड

मिक्लोश राद्नोती

फूल अर गंध

भागीरथ मेघवाल

म्हे तो प्रीत लुटाई अणहद

कल्याणसिंह राजावत

तूफांन

रेवतदान चारण कल्पित

आंसूड़ा

वासुदेव चतुर्वेदी

सफदर हासमी री मौत

गोरधन सिंह शेखावत

आगै अंधारौ

नंद भारद्वाज

अे दिवलै री जोत

किशोर कल्पनाकान्त

बीच आलां लोगां रौ बिलखणौ

हंस मैग्नस एनज़ेंसबर्गर

मां रौ नांव

महेश मोड़जी

सुवाद

मणि मधुकर

रुधन

प्रभात

अणूती रीत

ज्ञानसिंह चौहान ‘मोरपांख’

वो भेजै थनै

अर्जुनदेव चारण

आपणी बात छ

कमला गोतम