विडरूपता पर कवितावां

सामाजिक जीवण में आपां

रै असवाड़ै-पसवाड़ै अेड़ी केई विसमतावां हुवै जिणा सूं मिनख रौ जीवणौ, न जीवणै जेड़ौ हो ज्यावै। अठै संकलित रचनावां ई विसै सूं ई जुड़ियोड़ी है।

कविता313

मजूर रौ दिन

अर्जुनदेव चारण

लालू दादो

चन्द्र प्रकाश देवल

काळ

मणि मधुकर

म्हूँ जनता हूँ

भगवती लाल व्यास

बंटवारो

भगवती लाल व्यास

घर कठै है

अर्जुनदेव चारण

फाटोड़ी जेब

पारस अरोड़ा

आत्महंता

त्रिभुवन

जे म्हैं आदमी होऊँ

विमला महरिया 'मौज'

सबद कोस

अर्जुनदेव चारण

इण तरै रा सून्याड़ में

भगवती लाल व्यास

सातवौं फेरौ

अर्जुनदेव चारण

थूं कद जीवती ही मां

अर्जुनदेव चारण

नंग धड़ंग अरावळी

कन्हैयालाल सेठिया

मनीप्लांट

महेन्द्र भानावत

आग री ओळख

पारस अरोड़ा

चौपड़-पासा

मणि मधुकर

बज्यार

ओम नागर

थारी काया

अर्जुनदेव चारण

सुखसाज

मणि मधुकर

पद्मणी

अर्जुनदेव चारण

अेक बात

गोविन्द हाँकला

नफरत

भगवती लाल व्यास

सवाल-जवाब

हरीश व्यास

नसो

कल्याणसिंह राजावत

लक्खण

प्रेमजी ‘प्रेम’

रामपाळयो

गोविन्द हाँकला

गुवाड़ रो जायो

मोहम्मद सदीक

भींत

विनोद स्वामी

सपना

अर्जुनदेव चारण

हिसाब

पारस अरोड़ा

नरकवाड़ौ

मणि मधुकर

जूनो कानून

कोन्स्टेन्टिन बान्सेन्किन

जीवणकाळ

विलियम कार्लोस विलियम

पोमीजा आपां

नीरज दइया

हूंणी

मणि मधुकर

हाथ री बात

अर्जुनसिंह शेखावत

अेलांन

मणि मधुकर

सती

अर्जुनदेव चारण

अेक सीधी कविता

महावीर जोशी

मायकोव्हस्की रो तमंचो

येवेजनी येव्तुसेंको

वेस्या

सतीश छिम्पा

राजनीति

श्याम महर्षि