विडरूपता पर कवितावां

सामाजिक जीवण में आपां

रै असवाड़ै-पसवाड़ै अेड़ी केई विसमतावां हुवै जिणा सूं मिनख रौ जीवणौ, न जीवणै जेड़ौ हो ज्यावै। अठै संकलित रचनावां ई विसै सूं ई जुड़ियोड़ी है।

कविता456

लालू दादो

चन्द्र प्रकाश देवल

काळ

मणि मधुकर

मजूर रौ दिन

अर्जुनदेव चारण

बंटवारो

भगवती लाल व्यास

फाटोड़ी जेब

पारस अरोड़ा

आत्महंता

त्रिभुवन

थूं कद जीवती ही मां

अर्जुनदेव चारण

नंग धड़ंग अरावळी

कन्हैयालाल सेठिया

कांमणी

नंद भारद्वाज

सातवौं फेरौ

अर्जुनदेव चारण

घर कठै है

अर्जुनदेव चारण

जे म्हैं आदमी होऊँ

विमला महरिया 'मौज'

सबद कोस

अर्जुनदेव चारण

इण तरै रा सून्याड़ में

भगवती लाल व्यास

म्हूँ जनता हूँ

भगवती लाल व्यास

लेबल

माणक तिवारी 'बन्धु'

सफदर हासमी री मौत

गोरधन सिंह शेखावत

आगै अंधारौ

नंद भारद्वाज

अे दिवलै री जोत

किशोर कल्पनाकान्त

बीच आलां लोगां रौ बिलखणौ

हंस मैग्नस एनज़ेंसबर्गर

मां रौ नांव

महेश मोड़जी

सुवाद

मणि मधुकर

रुधन

प्रभात

निरमाण कै विनाश?

भागीरथ मेघवाल

फर्राटो

आर. सी. शर्मा ‘गोपाल’

मसाणा में लाडली

विमला महरिया 'मौज'

मृत्यु-बोध

पुरुषोत्तम छंगाणी

मैं

रतनलाल जोशी

प्रीत रै पाणै

सत्यनारायण इन्दौरिया

काळ/ अकाळ/ महाकाळ

रेवतदान चारण कल्पित

अजब अर अजनबी

हरिवंश राय बच्चन

भायला

श्याम गोइन्का

जीवण रौ ढंग

राजेन्द्र बोहरा

नारी

महावीर प्रसाद जोशी

बैठ्यो म्हारो गांव

कुंदन सिंह 'सजल'

गुमानीड़ा

अमोलकचन्द जांगिड़

आजादी रै ऊंखळ में

विक्रमसिंह गून्दोज

वै कुण है?

राजेन्द्र बोहरा

चेतौ

गोरधन सिंह शेखावत

क्रिस्णाकुमारी

अर्जुनदेव चारण

भानमती रो पीटारो

दीनदयाल ‘कुन्दन’

रातिंदो

गोरधन सिंह शेखावत

अछूत

प्रेमजी ‘प्रेम’

अरजी

शशिकुमार पारीक ‘परख’

व्लादिमिर इलिच लेनिन

व्लादिमीर मायकोव्स्की