विडरूपता पर कवितावां

सामाजिक जीवण में आपां

रै असवाड़ै-पसवाड़ै अेड़ी केई विसमतावां हुवै जिणा सूं मिनख रौ जीवणौ, न जीवणै जेड़ौ हो ज्यावै। अठै संकलित रचनावां ई विसै सूं ई जुड़ियोड़ी है।

कविता381

लालू दादो

चन्द्र प्रकाश देवल

काळ

मणि मधुकर

मजूर रौ दिन

अर्जुनदेव चारण

घर कठै है

अर्जुनदेव चारण

बंटवारो

भगवती लाल व्यास

फाटोड़ी जेब

पारस अरोड़ा

नंग धड़ंग अरावळी

कन्हैयालाल सेठिया

आत्महंता

त्रिभुवन

थूं कद जीवती ही मां

अर्जुनदेव चारण

जे म्हैं आदमी होऊँ

विमला महरिया 'मौज'

सबद कोस

अर्जुनदेव चारण

इण तरै रा सून्याड़ में

भगवती लाल व्यास

सातवौं फेरौ

अर्जुनदेव चारण

कांमणी

नंद भारद्वाज

म्हूँ जनता हूँ

भगवती लाल व्यास

अणूती रीत

ज्ञानसिंह चौहान ‘मोरपांख’

दूजौ घर

प्रमिला शंकर

वो भेजै थनै

अर्जुनदेव चारण

आपणी बात छ

कमला गोतम

उडीक

पारस अरोड़ा

रुखाळो

रतन ‘राहगीर’

दुरसंका

रफ़ाइल अलबर्ती

फरक दीठ रो

मदन गोपाल लढ़ा

गांव

गोरधन सिंह शेखावत

घाव-सुख

पारस अरोड़ा

इण धरती पै

रतन ‘राहगीर’

भविस

मणि मधुकर

पूरण होवण री आस

अर्जुनदेव चारण

गूंग रो घून्ट

मोहम्मद सदीक

उपज

मोड़सिंह बल्ला ‘मृगेन्द्र’

सीता

अर्जुनदेव चारण

लारलै बरस

श्याम महर्षि

काळ अर भूख

भगवती लाल व्यास

जूनी हवेली

भगवती लाल व्यास

हुवै रंग हजार

सांवर दइया

ओ जमारो

हरि प्रसाद पारीक

कूख-पड़्र्यै री पीड़

किशोर कल्पनाकान्त

सांप

त्रिभुवन

चीर-हरण

बद्रीदान गाडण

पिक्चर पोस्टरकार्ड

मिक्लोश राद्नोती

बो

श्याम महर्षि

फूल अर गंध

भागीरथ मेघवाल

म्हे तो प्रीत लुटाई अणहद

कल्याणसिंह राजावत

तूफांन

रेवतदान चारण कल्पित

आंसूड़ा

वासुदेव चतुर्वेदी

सफदर हासमी री मौत

गोरधन सिंह शेखावत

आगै अंधारौ

नंद भारद्वाज