विडरूपता पर कवितावां

सामाजिक जीवण में आपां

रै असवाड़ै-पसवाड़ै अेड़ी केई विसमतावां हुवै जिणा सूं मिनख रौ जीवणौ, न जीवणै जेड़ौ हो ज्यावै। अठै संकलित रचनावां ई विसै सूं ई जुड़ियोड़ी है।

कविता455

लालू दादो

चन्द्र प्रकाश देवल

काळ

मणि मधुकर

मजूर रौ दिन

अर्जुनदेव चारण

सातवौं फेरौ

अर्जुनदेव चारण

घर कठै है

अर्जुनदेव चारण

जे म्हैं आदमी होऊँ

विमला महरिया 'मौज'

सबद कोस

अर्जुनदेव चारण

इण तरै रा सून्याड़ में

भगवती लाल व्यास

बंटवारो

भगवती लाल व्यास

फाटोड़ी जेब

पारस अरोड़ा

आत्महंता

त्रिभुवन

थूं कद जीवती ही मां

अर्जुनदेव चारण

नंग धड़ंग अरावळी

कन्हैयालाल सेठिया

कांमणी

नंद भारद्वाज

म्हूँ जनता हूँ

भगवती लाल व्यास

चाँद पर मिनख

करणीदान बारहठ

मनीप्लांट

महेन्द्र भानावत

आग री ओळख

पारस अरोड़ा

चौपड़-पासा

मणि मधुकर

हे धरती मां

रामसिंह राठौड़ ‘डांवरा’

बज्यार

ओम नागर

हामळ

नरपत सिंह सोढ़ा

थारी काया

अर्जुनदेव चारण

सुखसाज

मणि मधुकर

पद्मणी

अर्जुनदेव चारण

अेक बात

गोविन्द हाँकला

नफरत

भगवती लाल व्यास

कयां बसै लो गांव

करणीदान बारहठ

चीर-हरण

बद्रीदान गाडण

पिक्चर पोस्टरकार्ड

मिक्लोश राद्नोती

बो

श्याम महर्षि

फूल अर गंध

भागीरथ मेघवाल

कुण जाणै?

स्वामी खुसाल नाथ

म्हे तो प्रीत लुटाई अणहद

कल्याणसिंह राजावत

तूफांन

रेवतदान चारण कल्पित

हाल देख’र

पूजाश्री

आंसूड़ा

वासुदेव चतुर्वेदी

सफदर हासमी री मौत

गोरधन सिंह शेखावत

नेता चालिसौ

ओम पुरोहित ‘कागद’

पेट री भूख

विक्रमसिंह गून्दोज

काळ

भगवान सैनी

भाग फूटयो ईमानदार निकळग्यो

लक्ष्मीनारायण रंगा

सरंग फाट जावैला

ब्रजमोहन सपूत

आम आदमी

रामनिवास सोनी

जुझारू रो सवाल

रतन ‘राहगीर’

बैरण होळी आगी

रघुराजसिंह हाड़ा