विडरूपता पर कवितावां

सामाजिक जीवण में आपां

रै असवाड़ै-पसवाड़ै अेड़ी केई विसमतावां हुवै जिणा सूं मिनख रौ जीवणौ, न जीवणै जेड़ौ हो ज्यावै। अठै संकलित रचनावां ई विसै सूं ई जुड़ियोड़ी है।

कविता253

काळ

मणि मधुकर

फाटोड़ी जेब

पारस अरोड़ा

थूं कद जीवती ही मां

अर्जुनदेव चारण

बंटवारो

भगवती लाल व्यास

आत्महंता

त्रिभुवन

नंग धड़ंग अरावळी

कन्हैयालाल सेठिया

जे म्हैं आदमी होऊँ

विमला महरिया 'मौज'

सातवौं फेरौ

अर्जुनदेव चारण

भूतणीं

विमला महरिया 'मौज'

इण तरै रा सून्याड़ में

भगवती लाल व्यास

घर कठै है

अर्जुनदेव चारण

म्हूँ जनता हूँ

भगवती लाल व्यास

मजूर रौ दिन

अर्जुनदेव चारण

जोग

मणि मधुकर

पाड़ोसण

मणि मधुकर

म्हारो भायलो

रतन ‘राहगीर’

सुपनो क साच

प्रकाशदान चारण

डूंगरी न्हें बौली

भोगीलाल पाटीदार

सीता

अर्जुनदेव चारण

काळ अर भूख

भगवती लाल व्यास

हुवै रंग हजार

सांवर दइया

कूख-पड़्र्यै री पीड़

किशोर कल्पनाकान्त

सांप

त्रिभुवन

मसाणा में लाडली

विमला महरिया 'मौज'

काळ/ अकाळ/ महाकाळ

रेवतदान चारण कल्पित

जीवण रौ ढंग

राजेन्द्र बोहरा

वै कुण है?

राजेन्द्र बोहरा

चेतौ

गोरधन सिंह शेखावत

क्रिस्णाकुमारी

अर्जुनदेव चारण

रातिंदो

गोरधन सिंह शेखावत

अछूत

प्रेमजी ‘प्रेम’

व्लादिमिर इलिच लेनिन

व्लादिमीर मायकोव्स्की

आज री नारी

रमेश मयंक

पनजी मारू

गोरधन सिंह शेखावत

पेड़ : चार कवितावां

अर्जुनदान चारण

वो भेजै थनै

अर्जुनदेव चारण

उडीक

पारस अरोड़ा

रुखाळो

रतन ‘राहगीर’

दुरसंका

रफ़ाइल अलबर्ती

गांव

गोरधन सिंह शेखावत

घाव-सुख

पारस अरोड़ा

इण धरती पै

रतन ‘राहगीर’

भविस

मणि मधुकर

पूरण होवण री आस

अर्जुनदेव चारण