विडरूपता पर कवितावां

सामाजिक जीवण में आपां

रै असवाड़ै-पसवाड़ै अेड़ी केई विसमतावां हुवै जिणा सूं मिनख रौ जीवणौ, न जीवणै जेड़ौ हो ज्यावै। अठै संकलित रचनावां ई विसै सूं ई जुड़ियोड़ी है।

कविता450

लालू दादो

चन्द्र प्रकाश देवल

काळ

मणि मधुकर

मजूर रौ दिन

अर्जुनदेव चारण

नंग धड़ंग अरावळी

कन्हैयालाल सेठिया

कांमणी

नंद भारद्वाज

सातवौं फेरौ

अर्जुनदेव चारण

घर कठै है

अर्जुनदेव चारण

जे म्हैं आदमी होऊँ

विमला महरिया 'मौज'

सबद कोस

अर्जुनदेव चारण

इण तरै रा सून्याड़ में

भगवती लाल व्यास

बंटवारो

भगवती लाल व्यास

फाटोड़ी जेब

पारस अरोड़ा

आत्महंता

त्रिभुवन

थूं कद जीवती ही मां

अर्जुनदेव चारण

म्हूँ जनता हूँ

भगवती लाल व्यास

बज्यार

ओम नागर

हामळ

नरपत सिंह सोढ़ा

थारी काया

अर्जुनदेव चारण

सुखसाज

मणि मधुकर

पद्मणी

अर्जुनदेव चारण

अेक बात

गोविन्द हाँकला

नफरत

भगवती लाल व्यास

कयां बसै लो गांव

करणीदान बारहठ

भड़ास

हरदान हर्ष

म्हारी आ लापरवाही

भागीरथसिंह भाग्य

घर

नीरज दइया

काल थे खुद

सांवर दइया

मरता-जींवता

बाबूलाल शर्मा

मौसम री मार

पारस अरोड़ा

अभाव मूं

हरदान हर्ष

दिनूगै री गाड्यां

बरीस पास्तरनाक

सुळ सुळियो

मोहम्मद सदीक

आपां रै नांवै

सत्येन जोशी

छळ

हरदान हर्ष

घोळ-मथोळ

महावीर जोशी

अमूझणी भर्‌या दिन

भगवती लाल व्यास

अध्यक्षता

राणुसिंह राजपुरोहित

म्हैं कुण?

श्याम महर्षि

अेक समिक्सक : कल्पना रौ

मंगेश पाडगांवकर

मानखै री पत

मोहम्मद सदीक

जोग

मणि मधुकर

पाड़ोसण

मणि मधुकर

म्हांरौ गांव

बस्तीमल सोलंकी भीम

म्हारो भायलो

रतन ‘राहगीर’

विश्वकप

रामजीलाल घोड़ेला 'भारती'