विडरूपता पर लेख
सामाजिक जीवण में आपां
रै असवाड़ै-पसवाड़ै अेड़ी केई विसमतावां हुवै जिणा सूं मिनख रौ जीवणौ, न जीवणै जेड़ौ हो ज्यावै। अठै संकलित रचनावां ई विसै सूं ई जुड़ियोड़ी है।
रै असवाड़ै-पसवाड़ै अेड़ी केई विसमतावां हुवै जिणा सूं मिनख रौ जीवणौ, न जीवणै जेड़ौ हो ज्यावै। अठै संकलित रचनावां ई विसै सूं ई जुड़ियोड़ी है।
जलाल और बूबना की प्रेमकथा राजस्थान में सुप्रसिद्ध है। इसी प्रकार यहाँ जलाल के सम्बंध में कई लोकगीत भी गाए जाते हैं, जिनमें से अनेक प्रकाशित हो चुके हैं। फिर भी कई गीत अभी अप्रकाशित ही हैं। यहां ऐसे दो लोकगीत प्रस्तुत किए जाते हैं। जलाल और बूबना के
13 दिसबर री रात भारतीय सिनिमा सारू घोर काळी रात साबित हुई। कला-प्रेमियां री दुआवां अर फिलमकारां री उम्मीदा माथै पाणी फेरती थकी जगचावी भारतीय अभिनेत्री स्मिता नै जिंदगी डसगी अर मौत री लड़ाई में मौत जीतगी। लगौलग 25 घंटां तांई जूझती रैयी। रात रा साढी बारा