बेटी पर कवितावां

हिंदी कविता में बेटियों

का आगमन उनकी आशाओं-आकांक्षाओं और नम्र आक्रोश के साथ हुआ है, तो पिता बनकर उतरे कवियों ने उनसे संवाद की कोशिश भी की है। प्रस्तुत चयन में इस दुतरफ़ा संवाद को अवसर देती कविताओं का संकलन किया गया है।

कविता102

वो झुरै

अर्जुनदेव चारण

ओ गांव है

रामस्वरूप किसान

बेटी

मनोज कुमार स्वामी

बेटियां

कृष्णा आचार्य

जोसी जी री बात

सत्यनारायण सोनी

मावड़ी अर धिवड़ी

अनुश्री राठौड़

म्हारी उमर

रामाराम चौधरी

बेटा कद आवैला गांव

राजूराम बिजारणियां

थळी रा संस्कार

राजूराम बिजारणियां

दायजो

नैनमल जैन

बेटी

मीनाक्षी बोराणा

बदळती मानता

सुशीला ढाका

चिड़कली

संतोष शेखावत ‘बरड़वा’

दिवला अर बाट

अंकिता पुरोहित

बाबुल

नीलम शर्मा ‘नीलू’

पिताजी

अंकिता पुरोहित

धीयां नै

सत्यप्रकाश जोशी

तोम्बडू

शैलेन्द्र उपाध्याय

बेटी

बाबूलाल शर्मा

आओ बेटी बचावां

रचना शेखावत

म्हारै घरां सूरज कद उगसी?

श्री कृष्ण 'जुगनू'

झमकू

श्याम महर्षि

मायड़ कैवै बेटी नैं

रेनू सिरोया ‘कुमुदिनी’

बेटा बेटी में फरक

राजेन्द्र बारहठ

आसंग

मनोज कुमार स्वामी

म्हूं कांई मं पाछै छूं

मंजू किशोर 'रश्मि'

मां-बेटी

ज़ेबा रशीद

मां

अंकिता पुरोहित

कागद रा टुकड़ा

धनपत स्वामी

दो दांतां पै

विष्णु विश्वास

लाडली

हरिराम गोपालपुरा

रुधन

प्रभात

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ

गणपत सिंह ‘मुग्धेश’

बाबू सा थारा आँगणा

शकुंतला अग्रवाल 'शकुन'

देहळी

कुमार अजय

दूजौ घर

प्रमिला शंकर

लिछमी रौ अवतार

सुमन पड़िहार

सूकी रोटी

जनकराज पारीक

बेटी अर बेटो

पवन कुमार राजपुरोहित

सांची पूछौ तौ

कुन्दन माली

घर सूं भाजयोड़ी छोरी

पवन सिहाग 'अनाम'

मा री पीड़

नमामीशंकर आचार्य

अड़क बोरड़ी

प्रवीण सुथार

सीख

अमर सिंह राजपुरोहित