बेटी पर गीत

हिंदी कविता में बेटियों

का आगमन उनकी आशाओं-आकांक्षाओं और नम्र आक्रोश के साथ हुआ है, तो पिता बनकर उतरे कवियों ने उनसे संवाद की कोशिश भी की है। प्रस्तुत चयन में इस दुतरफ़ा संवाद को अवसर देती कविताओं का संकलन किया गया है।

गीत17

सीखड़ली

कानदान ‘कल्पित’

धरती री पहली बेटी

मेघराज मुकुल

छाँव सरीखी बेटी है

राजूराम बिजारणियां

म्हूं बेटी बाबल री छोटी

छैलूदान चारण 'छैल'

लाडल बेटी

आशा शर्मा

सीख सिखाऊं

गजानन वर्मा

लिछमी

रेवतदान चारण कल्पित

काळी

कैलाश मंडेला

अेक भ्रुण गीत

नंदकिशोर 'निर्झर'

बेटी

गीता जाजपुरा

कबूतराँ को जोड़ो

रघुराजसिंह हाड़ा

लाडली

मुकुट मणिराज

पालणा मधरो मधरो हाल

ब्रजमोहन सपूत

पीहर की पगडण्डी

किशन लाल वर्मा

रूपाळी गिणगौर

धनंजया अमरावत

मन की बुझाऊं

मुकुट मणिराज