ओळमौ पर कवितावां

हर भाषा रै साहित्य में

हर विसै सूं एक शिकायत प्रगट करी जावै, कविता अर लोक में उणनै 'ओळमौ'कैवै। अठै प्रस्तुत चयन रौ आधार ओळमौ है।

कविता112

राजमहलां सांभळौ

तेजस मुंगेरिया

तूं

सत्य पी. गंगानगर

पांखी री पीड़

भगवती लाल व्यास

अमोघ ओखध

मगर चन्द्र दवे

आदमी नै बईरु

दीपिका दीक्षित

सुतन्तर नागरिक

कमर मेवाड़ी

मिनख रा चाळा

इन्द्रा व्यास

थूं आज्या नीं

कुमार अजय

सगती लछमी सार

ब्रजनारायण पुरोहित

हाथ री बात

अर्जुनसिंह शेखावत

कसक

किरण बाला 'किरन'

आवो आपां घूमां

दुष्यन्त जोशी

मरजादा

बी. एल. माली ‘अशान्त’

मनड़ै रो मारग

कृष्णा आचार्य

सावचेत

राजकुमारी पारीक

दीठ

अर्जुनसिंह शेखावत

थे साहित्यकार हो!

महेन्द्रसिंघ महलान

थांरै बिना

कृष्णा आचार्य

दरसाव

जितेन्द्र निर्मोही

बेटी री पीड़

छैलूदान चारण 'छैल'

खुद रो दम

कैलाश मंडेला

हिये रे आळे-याळे

शंकरलाल मीणा

अरजी पंचां की

नयनूराम शर्मा

दुनियादारी

नन्दकिशोर चतुर्वेदी

मारग चालण में फरक

अमृतसिंह पंवार

तिरस अर समन्दर

सुरेन्द्र अंचल

वृद्धा-रूप

कल्याण गौतम

टापरी

रमेश मयंक

दंगां रै पछै

श्यामसुंदर भारती

रेत

प्रेम शर्मा

रात

अशोक परिहार 'उदय'

हेताळू

कमर मेवाड़ी

छूट

राणुसिंह राजपुरोहित

भूख

शंभुदान मेहडू

करड़ो सांच

कैलाश मंडेला

बिरहण

भवानीसिंह राठौड़ 'भावुक’

अंतस रो ओळमो

देवीलाल महिया

रसोई

कमल किशोर पिपलवा

काल अर आज

ज़ेबा रशीद

चमचो

अनुज श्रीमाली ‘भाल कवि’

म्हूं बापड़ौ

मोड़सिंह बल्ला ‘मृगेन्द्र’