समाज पर कुंडलियाँ

औमतौर सूं किणी संगठित

समूह नै समाज केय दियौ जावै पण उणरौ विमर्श लांबौ अनै महताऊ है। अठै संकलित रचनावां समाज सबद रै औळै-दौळै रचियोड़ी है।

कुण्डळियौ छंद2

आज री कुंडळियां

केसरी कान्त शर्मा

तातो लोह लुहार को मार हथोड़ा खाय

गोपीनाथ पारीक ‘गोपेश’