समाज पर कुंडलियाँ

औमतौर सूं किणी संगठित

समूह नै समाज केय दियौ जावै पण उणरौ विमर्श लांबौ अनै महताऊ है। अठै संकलित रचनावां समाज सबद रै औळै-दौळै रचियोड़ी है।

कुण्डळियौ छंद1

आज री कुंडळियां

केसरी कान्त शर्मा