समाज पर दूहा

औमतौर सूं किणी संगठित

समूह नै समाज केय दियौ जावै पण उणरौ विमर्श लांबौ अनै महताऊ है। अठै संकलित रचनावां समाज सबद रै औळै-दौळै रचियोड़ी है।

दूहा4

जात बणाद्‌यै कागलो

शिवराज भारतीय

चैत

रेवतदान चारण कल्पित

औ सांसा झालणा पड़ैला!

विनोद सारस्वत

दारू रा दूहा

कुंदन सिंह 'सजल'