समाज पर लेख
औमतौर सूं किणी संगठित
समूह नै समाज केय दियौ जावै पण उणरौ विमर्श लांबौ अनै महताऊ है। अठै संकलित रचनावां समाज सबद रै औळै-दौळै रचियोड़ी है।
समूह नै समाज केय दियौ जावै पण उणरौ विमर्श लांबौ अनै महताऊ है। अठै संकलित रचनावां समाज सबद रै औळै-दौळै रचियोड़ी है।
जलाल और बूबना की प्रेमकथा राजस्थान में सुप्रसिद्ध है। इसी प्रकार यहाँ जलाल के सम्बंध में कई लोकगीत भी गाए जाते हैं, जिनमें से अनेक प्रकाशित हो चुके हैं। फिर भी कई गीत अभी अप्रकाशित ही हैं। यहां ऐसे दो लोकगीत प्रस्तुत किए जाते हैं। जलाल और बूबना के
आई. अे. अेस री ट्रेनिंग रै बाद पैली पोस्टिंग अेस.डी.अेम. माउंट आबू रै रूप मांय मिली। पैली पोस्टिंग अर बा ई राजस्थान रै सुरग मांय, जठै माउंट आबू तो टूरिस्टां सूं भरयो रैवतो, पण आबू रोड (तहसील आबू रोड मांय है अर अेस.डी.अेम माउंट आबू) तो टूरिस्टां सूं भरयौ
एक लम्बे समय से लोक-गीत एवं लोक-संगीत पर कार्य करते रहने का अवसर मिला। सन् 1953 की बात है जब पहली बार लोक-गीतों के विषय में सोचने का अनायास क्रम प्रारम्भ हुआ। बिज्जी एवं मैं 'प्रेरणा' नाम से एक हिन्दी साहित्य की मासिक पत्रिका का सम्पादन कर रहे थे।