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समूह नै समाज केय दियौ जावै पण उणरौ विमर्श लांबौ अनै महताऊ है। अठै संकलित रचनावां समाज सबद रै औळै-दौळै रचियोड़ी है।

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मेवाड़ी फागण

रुतराज बसन्त रौ आगमण आदि काळ सूं ही सारी सिस्टि में जड़ अर चेतन में अेक नवो जीवण देतो रह्यो है। आपणै देस रै हरेक प्रान्त में बसन्त रुत रो स्वागत आप-आप रै निराळै ढंग सूं करता आया है। संस्कृत री जूनी पोथ्यां पढ़बा सूं पतो लागै कै प्राचीन काळ में बसन्त

रानी लक्ष्मीकुमारी चूण्डावत

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