समाज पर बंतळ
औमतौर सूं किणी संगठित
समूह नै समाज केय दियौ जावै पण उणरौ विमर्श लांबौ अनै महताऊ है। अठै संकलित रचनावां समाज सबद रै औळै-दौळै रचियोड़ी है।
समूह नै समाज केय दियौ जावै पण उणरौ विमर्श लांबौ अनै महताऊ है। अठै संकलित रचनावां समाज सबद रै औळै-दौळै रचियोड़ी है।
राजस्थांनी रा जांणीता अर मानीता कवि कन्हैयालालजी सेठिया नै कुण नीं जांणै? ‘आ धरती गोरा धोरां री’, ‘औ जमीन रौ धणी के वौ जमीन रौ धणी’, ‘अरे घास री रोटी ई जद बन बिलावड़ौ ले भाग्यौ’ इत्याद अलेखूं कवितावां राजस्थांन री धरती अर संस्क्रती सूं तौ ओळखांण करावै