समाज पर डांखळा

औमतौर सूं किणी संगठित

समूह नै समाज केय दियौ जावै पण उणरौ विमर्श लांबौ अनै महताऊ है। अठै संकलित रचनावां समाज सबद रै औळै-दौळै रचियोड़ी है।

डांखळा1

अर्‌जीनवीस होया करतो

विद्यासागर शर्मा