समाज पर कवितावां

औमतौर सूं किणी संगठित

समूह नै समाज केय दियौ जावै पण उणरौ विमर्श लांबौ अनै महताऊ है। अठै संकलित रचनावां समाज सबद रै औळै-दौळै रचियोड़ी है।

कविता124

काळ

मणि मधुकर

अणहद नाद

भगवती लाल व्यास

म्हूँ जनता हूँ

भगवती लाल व्यास

थूं कद जीवती ही मां

अर्जुनदेव चारण

सातवौं फेरौ

अर्जुनदेव चारण

घर कठै है

अर्जुनदेव चारण

बंटवारो

भगवती लाल व्यास

शमसाँण री कणेर

भगवती लाल व्यास

आग री ओळख

पारस अरोड़ा

चौपड़-पासा

मणि मधुकर

थारी काया

अर्जुनदेव चारण

पद्मणी

अर्जुनदेव चारण

अेक बात

गोविन्द हाँकला

नफरत

भगवती लाल व्यास

परलै री घड़ी

अर्जुनदेव चारण

प्रेम अर जबर

सतीश छिम्पा

फूलम-कथा

मणि मधुकर

गारड़ी

मणि मधुकर

आंकड़ा का फूल

प्रेमजी ‘प्रेम’

इमरत अर जैर

प्रकाशदान चारण

म्हैं

मोहन आलोक

साख राणी उमादे री

सत्यप्रकाश जोशी

ओळखाण

गोविन्द हाँकला

परमेसर

प्रेमजी ‘प्रेम’

जूंझार

गोरधन सिंह शेखावत

लाचारी

मणि मधुकर

एक च्यूंठी तावड़ी

रामस्वरूप ‘परेश’

रामपाळयो

गोविन्द हाँकला

गुवाड़ रो जायो

मोहम्मद सदीक

हूंणी

मणि मधुकर

अेलांन

मणि मधुकर

सती

अर्जुनदेव चारण

वेस्या

सतीश छिम्पा

ओ रोळ राज रो डंडो...

विनोद सारस्वत

जद तूटै अंबर सूं तारौ

रेवतदान चारण कल्पित

आभै रै अधबीच

प्रकाशदान चारण

अन्तस उठ बोल्यो

मोहम्मद सदीक

आपणी लेखणी सूं

विमला भंडारी

के नांव द्यूं?

रामस्वरूप ‘परेश’

बाकी हिसाब

पारस अरोड़ा

झूठौ बणज

प्रेमजी ‘प्रेम’

आखड़ी

अर्जुनदेव चारण

म्हूँ अछूत

मुकुट मणिराज

बाड़ अर गुलाब

गोरधन सिंह शेखावत

ब्रितांत

मणि मधुकर

देस

मोहन आलोक

बेटा

अशोक कुमार दवे