समाज पर कवितावां

औमतौर सूं किणी संगठित

समूह नै समाज केय दियौ जावै पण उणरौ विमर्श लांबौ अनै महताऊ है। अठै संकलित रचनावां समाज सबद रै औळै-दौळै रचियोड़ी है।

कविता151

काळ

मणि मधुकर

सबद कोस

अर्जुनदेव चारण

शमसाँण री कणेर

भगवती लाल व्यास

बंटवारो

भगवती लाल व्यास

सातवौं फेरौ

अर्जुनदेव चारण

घर कठै है

अर्जुनदेव चारण

थूं कद जीवती ही मां

अर्जुनदेव चारण

अणहद नाद

भगवती लाल व्यास

म्हूँ जनता हूँ

भगवती लाल व्यास

बोल भारमली

सत्यप्रकाश जोशी

ज़िन्दगी

भगवती लाल व्यास

नींद अर बातां

अर्जुनदेव चारण

सफदर हासमी री मौत

गोरधन सिंह शेखावत

आगै अंधारौ

नंद भारद्वाज

मां रौ नांव

महेश मोड़जी

सुवाद

मणि मधुकर

घुड़दौड़

गोरधन सिंह शेखावत

जुझारू रो सवाल

रतन ‘राहगीर’

थै जाणो हो

सांवर दइया

थूं कांई कैवैलौ?

जोसेफ सीमोन कॉटर जूनियर

म्हैं नीं हारी

चंद्रशेखर अरोड़ा

सिड़िज्योड़ा होठ

कृष्ण बिश्नोई

टूटोड़ी भींत बता...

चंद्रशेखर अरोड़ा

नेता चालिसौ

ओम पुरोहित ‘कागद’

पेट री भूख

विक्रमसिंह गून्दोज

अडवाणो

सत्यप्रकाश जोशी

अणूती रीत

मोर पांख

उडीक

पारस अरोड़ा

रुखाळो

रतन ‘राहगीर’

कुण सुणै?

दीनदयाल ओझा

नेतो

रामनिवास सोनी

गांव

गोरधन सिंह शेखावत

इण धरती पै

रतन ‘राहगीर’

भविस

मणि मधुकर

दुसासण

मणि मधुकर

सीता

अर्जुनदेव चारण

भासा रो गीत

मोहन आलोक

अरज

रामेश्वर दयाल श्रीमाली

प्यार रौ सनैसो

विनोद सोमानी 'हंस'

बाळपणो

कल्याण गौतम

वन-महोच्छब

भगवती लाल व्यास

आं दिनां में

गोरधन सिंह शेखावत

विरोधाभास

सूर्यशंकर पारीक

तीजी रेख

अर्जुनदेव चारण

बापड़ी कविता

महेन्द्र मील

वै कुण है?

राजेन्द्र बोहरा

रातिंदो

गोरधन सिंह शेखावत

अछूत

प्रेमजी ‘प्रेम’