वियोग पर कवितावां

वियोग संयोग के अभाव

या मिलाप न होने की स्थिति और भाव है। शृंगार में यह एक रस की निष्पत्ति का पर्याय है। माना जाता है कि वियोग की दशा तीन प्रकार की होती है—पूर्वराग, मान और प्रवास। प्रस्तुत चयन में वियोग के भाव दर्शाती कविताओं का संकलन किया गया है।

कविता79

हिज्र

सत्य पी. गंगानगर

शमसाँण री कणेर

भगवती लाल व्यास

कुरजां

चैन सिंह शेखावत

ऊजड़ चूल्हां री राख

रामस्वरूप किसान

बायरिया!

नैनमल जैन

आ बैठ बात करां - 5

रामस्वरूप किसान

छेहली बातचीत

रेवंत दान बारहठ

अणछेड़्या सिणगार

तारादत्त निर्विरोध

कुरजां री कुरलाट

चंद्रशेखर अरोड़ा

मैसेज

किरण राजपुरोहित 'नितिला'

परदेसी

शिवदान सिंह जोलावास

ऊंडै आभै गूंजती

मालचंद तिवाड़ी

चाँद अर सूरज

निशा आर्य

या न्हैं बूझौ थैं बण कांई बीती

कृष्णा कुमारी ‘कमसिन’

तू याद कर

हरीश हैरी

रुखाळौ

मणि मधुकर

पीड़

शिवराज भारतीय

सीखड़ली री वेळा

निर्मला राठौड़

साख राणी उमादे री

सत्यप्रकाश जोशी

झील अर आंख्यां

इन्द्र प्रकाश श्रीमाली

बिरह

अनीता सैनी ‘दीप्ति'

साथ

नंदकिशोर सोमानी ‘स्नेह'

मोह

सत्य पी. गंगानगर

अचपळा बादळ

नरेंद्र व्यास

जावतै बरस री जुदाई

प्रमिला शंकर

ओळ्यूं

बंशीलाल सोलंकी

बोल भारमली

सत्यप्रकाश जोशी

आज रो मिनख

कृष्ण बिश्नोई

सनेसो

सत्यप्रकाश जोशी

सनेसौ

चन्द्र प्रकाश देवल

आ काळी बादळी

फतहलाल गुर्जर 'अनोखा'

नेह रौ दिवलौ

निर्मला राठौड़

तिरस

भगवती लाल व्यास

लोर

सुबोधकुमार अग्रवाल

चिरमी रौ गीत

प्रमिला शंकर

घाव

मणि मधुकर

कांई बोलां बोल

महेन्द्र मील

सावणिये रा लोर

सोनी सांवरमल

मरद-लुगाई

सत्यप्रकाश जोशी

पडळां

कुमार अजय

मारूणी

आभा माथुर

आंसू मण-मण को

ब्रजमोहन सपूत

मीठी याद में

विनोद सोमानी 'हंस'

पतियारो

मदन गोपाल लढ़ा

बासन्ती बायरियो

फतहलाल गुर्जर 'अनोखा'

रेशम री डोर

नीलम पारीक

तू नईं आई

कृष्ण बृहस्पति

'गणगौर'

विष्णु विश्वास