वियोग पर कवितावां

वियोग संयोग के अभाव

या मिलाप न होने की स्थिति और भाव है। शृंगार में यह एक रस की निष्पत्ति का पर्याय है। माना जाता है कि वियोग की दशा तीन प्रकार की होती है—पूर्वराग, मान और प्रवास। प्रस्तुत चयन में वियोग के भाव दर्शाती कविताओं का संकलन किया गया है।

कविता84

हिज्र

सत्य पी. गंगानगर

विरह

नारायण सिंह भाटी

ऊजड़ चूल्हां री राख

रामस्वरूप किसान

बायरिया!

नैनमल जैन

शमसाँण री कणेर

भगवती लाल व्यास

कुरजां

चैन सिंह शेखावत

आ बैठ बात करां - 5

रामस्वरूप किसान

छेहली बातचीत

रेवंत दान बारहठ

अणछेड़्या सिणगार

तारादत्त निर्विरोध

कुरजां री कुरलाट

चंद्रशेखर अरोड़ा

पीड़

शिवराज भारतीय

सीखड़ली री वेळा

निर्मला राठौड़

साख राणी उमादे री

सत्यप्रकाश जोशी

झील अर आंख्यां

इन्द्र प्रकाश श्रीमाली

बिरह

अनीता सैनी ‘दीप्ति'

साथ

नंदकिशोर सोमानी ‘स्नेह'

मोह

सत्य पी. गंगानगर

सरद रो अभिसार

रामनाथ व्यास ‘परिकर’

साख राजा मालदेव री

सत्यप्रकाश जोशी

मन री बातां कुण जाणै

मुकारब खान ‘आज़ाद’

हड़ताल

मदनमोहन परिहार

विदा

चयरिल अनवर

संदेसो

मधुकर गौड़

चिड़कलो

चतुर कोठारी

अचपळा बादळ

नरेंद्र व्यास

जावतै बरस री जुदाई

प्रमिला शंकर

ओळ्यूं

बंशीलाल सोलंकी

प्रीतड़ी

मदनमोहन परिहार

बोल भारमली

सत्यप्रकाश जोशी

आज रो मिनख

कृष्ण बिश्नोई

सनेसो

सत्यप्रकाश जोशी

सनेसौ

चन्द्र प्रकाश देवल

आ काळी बादळी

फतहलाल गुर्जर 'अनोखा'

नेह रौ दिवलौ

निर्मला राठौड़

तिरस

भगवती लाल व्यास

दोय विचार

कमला वर्मा

लोर

सुबोधकुमार अग्रवाल

चिरमी रौ गीत

प्रमिला शंकर

घाव

मणि मधुकर

कांई बोलां बोल

महेन्द्र मील

सावणिये रा लोर

सोनी सांवरमल

मरद-लुगाई

सत्यप्रकाश जोशी

पडळां

कुमार अजय

मारूणी

आभा माथुर

आंसू मण-मण को

ब्रजमोहन सपूत

मीठी याद में

विनोद सोमानी 'हंस'