वियोग पर पद

वियोग संयोग के अभाव

या मिलाप न होने की स्थिति और भाव है। शृंगार में यह एक रस की निष्पत्ति का पर्याय है। माना जाता है कि वियोग की दशा तीन प्रकार की होती है—पूर्वराग, मान और प्रवास। प्रस्तुत चयन में वियोग के भाव दर्शाती कविताओं का संकलन किया गया है।

पद11

पियाजी आइ मिलउ इक वेर

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

पावस विरहिणी न सुहाइ

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

काहु सुं प्रीति न कीजइ

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

नेमि काहे कुं दुख दीनउ हो

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

सखी री घोर घटा घहराइ

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

मो पइ कठिन वियोग की

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

सखी री चंदन दूरि निवारि

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’