फुटरापौ पर कवितावां

फूटरापौ एक भाव है। राजस्थानी

री सगळी बोलियां में फूटरापै रा अलेखूं पर्यायवाची है। अठै प्रस्तुत संकलन में फूटरापै नै लेय'र रचियोड़ी कवितावां रो संग्रै करीज्यो है।

कविता156

प्रेम री परिभाषा

सत्येंद्र चारण

मूंडो दूधां धोयो

प्रेमजी ‘प्रेम’

रोहिड़े रा फूल

मृदुला राजपुरोहित

म्हारै पुराणियां घर री

मृदुला राजपुरोहित

निभ जावै हर रिश्तो

अनुश्री राठौड़

मिनख री सुतंतरता

रेणुका व्यास 'नीलम'

पासाण सुंदरी

नारायण सिंह भाटी

सांझ-सुंदरी

महेंद्रसिंह छायण

नाडी रो जळ

गजेन्द्र कंवर चम्पावत

मरुधर महिमा

कृष्णपाल सिंह राखी

बम्बोई में

आक्सेल लिंडेन

म्हारौ देस

रेवतदान चारण कल्पित

तर-तर बसै सौरम

राजेश कुमार व्यास

इण भांत राखी थूं

मालचंद तिवाड़ी

थूं आज्या नीं

कुमार अजय

मन री ड्योढी

ज़ेबा रशीद

संझ्या : तीन चतराम

प्रेमजी ‘प्रेम’

लुगाई

थानेश्वर शर्मा

वा नाची ठेठ ग्रामगीत

ओमप्रकाश सरगरा 'अंकुर'

प्रणय

ओमप्रकाश गर्ग 'मधुप'

बेल म्हूं

सन्तोष मायामोहन

सतमासिया सपना

कृष्ण बृहस्पति

चांदणी पील्यां

रघुराजसिंह हाड़ा

प्रीत रै आंगणै

बंशी यथार्थ

मनड़ै रो मारग

कृष्णा आचार्य

बूढ़ी काकी

दिनेश चारण

काग उड़ायनै साजन बुलाऊं

दीपा परिहार 'दीप्ति'

छेकड़ ताल रो अेक बोल

मालचंद तिवाड़ी

म्हारो प्रणाम!

राजेश कुमार व्यास

आइनो

ज़ेबा रशीद

मोट्यार मौसम

प्रेमजी ‘प्रेम’

कळी-कचनार

ताऊ शेखावटी

गांव

कमल किशोर पिपलवा

थेपड्यां रै मिस

गौरीशंकर निमिवाळ

फूटरा

मनोज कुमार स्वामी

गोरी गोरी गजबण

दुर्गादान सिंह गौड़

उजास री सीरणी

राजेश कुमार व्यास

ममोलियो

सुमन पड़िहार

रूप

सत्यप्रकाश जोशी

विश्वसुन्दरी रै मिस

अन्नाराम ‘सुदामा'

जथाजोग

मणि मधुकर

उतरी चांदणी

प्रेमजी ‘प्रेम’

पतझाड़

मणि मधुकर

जागण री वेळा

मेघराज मुकुल

भायला

नवनीत पाण्डे

रूपक

आईदान सिंह भाटी