फुटरापौ पर कवितावां

फूटरापौ एक भाव है। राजस्थानी

री सगळी बोलियां में फूटरापै रा अलेखूं पर्यायवाची है। अठै प्रस्तुत संकलन में फूटरापै नै लेय'र रचियोड़ी कवितावां रो संग्रै करीज्यो है।

कविता185

प्रेम री परिभाषा

सत्येंद्र चारण

पासाण सुंदरी

नारायण सिंह भाटी

मिरगानैणी सिणगार

रेवंत दान बारहठ

सांझ-सुंदरी

महेंद्रसिंह छायण

म्हारौ गांव

हरमन चौहान

मूंडो दूधां धोयो

प्रेमजी ‘प्रेम’

रोहिड़े रा फूल

मृदुला राजपुरोहित

म्हारै पुराणियां घर री

मृदुला राजपुरोहित

निभ जावै हर रिश्तो

अनुश्री राठौड़

मिनख री सुतंतरता

रेणुका व्यास 'नीलम'

आपणो थार

रामकुमार भाम्भू

हाल-चाल

कुलदीप पारीक 'दीप'

आंख्यां

त्रिभुवन

सवार

मालचंद तिवाड़ी

झील रो पाणी

रमेश मयंक

दीठ सूं उपजै नेह

राजेश कुमार व्यास

उण वगत अर इण वगत

फ्रेडरिक होल्डरलिन

आ सांस जियां

सांवर दइया

अढाई आखरां रौ अभिमन्यु

शंकरसिंह राजपुरोहित

घर-संसार

रतन ‘राहगीर’

मिनख-मिनख री मार

कपिलदेव आर्य

गवरी रौ गावणौ

नारायण सिंह भाटी

चांद रो चितराम

चैन सिंह शेखावत

धरती

भवानी शंकर व्यास ‘विनोद’

कांई मांडू?

अतुल कनक

साटिया री छोरी सूं

गोरधन सिंह शेखावत

धोरां री धरती

शिवराज भारतीय

बाळपणै रो शो-केस

मालचंद तिवाड़ी

सगाई

प्रभात

म्हारा आंगणा रो नीमड़ो

हेमन्त गुप्ता पंकज

म्हारौ लेखण

प्रमिला शंकर

माँ रा सपना

राजदीप सिंह इन्दा

आभै रो आभार

राजेश कुमार व्यास

हेत प्रीत री हथाई

नाथूसिंह इंदा

पै’लगांम

मणि मधुकर

बा म्हनैं

दुष्यंत

तिरस अर समन्दर

सुरेन्द्र अंचल

मिलण-सिंझ्या

मेघराज मुकुल

जोवो तो सरी

पुरुषोत्तम छंगाणी

सैनाई

मणि मधुकर

मूमल

नारायण सिंह भाटी

रूपा बावळी

रामदयाल मेहरा

खजाणौ

घनश्याम नाथ कच्छावा

सुराज रै खांध

कृष्ण बिश्नोई

सै सूं सुन्दर पुसब

रेणुका व्यास 'नीलम'