फुटरापौ पर कवित्त

फूटरापौ एक भाव है। राजस्थानी

री सगळी बोलियां में फूटरापै रा अलेखूं पर्यायवाची है। अठै प्रस्तुत संकलन में फूटरापै नै लेय'र रचियोड़ी कवितावां रो संग्रै करीज्यो है।

कवित्त18

पदमगंध पदमनी

जटमल नाहर

वीज जेम झलकंत

दलपत विजय

रूपवंत रतिरंभ

दलपत विजय

लोयण भरि निरखंत

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

गोरउ सउ गात रसीली सी बात

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

जाके आछे तीछे नयण

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

अैसी यह रीतिसौ लुभानै

बुद्धसिंह हाड़ा

सुंदर वेस लवेस अनोपम

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’