श्याम महर्षि
आठवें दसक री राजस्थानी कविता रा उल्लेखणजोग कवि। त्रेमासिक पत्रिका 'राजस्थली' रा संपादक।
आठवें दसक री राजस्थानी कविता रा उल्लेखणजोग कवि। त्रेमासिक पत्रिका 'राजस्थली' रा संपादक।
आंधी
आवण वाळा दिन
अबै बोलण लागग्या है केई लोग
आभौ
अछूत
अकाल
अंधारपख
अर्थशास्त्री
भैस्यां
भाषा
भेडां
बिरखा सूं पै'ल्यां
बो
बुहारी
चौथ रौ चांद
छोर्यां
चिड़कली
चिट्ठी
डाणगत घर
गांव
गांव री लुगायां
हांती
हाथ
हथियार
जीवली खै’णा
झमकू
जुलम
काळ
कविता
कुम्हारां रो बास
लारलै बरस
मा जाई बैनां
म्हैं कुण?
म्हारो गांव
मिनखपणौ
नेतो
ओळ्यूं
पख-विपख
पोसाळ
पोसाळ
पूछैला अेक दिन
पुजारी
राजनीति
राजनीति
सबद
सांस्कृतिक चेतना
सुपनो
सूरज
थम्योड़ो गांव
ऊगतो सूरज