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देवीलाल महिया
नूवी पीढ़ी रा कवि। 'अंतस रो ओळमो’ कविता संग्रै पर केंद्रीय साहित्य अकादमी रौ युवा पुरस्कार।
नूवी पीढ़ी रा कवि। 'अंतस रो ओळमो’ कविता संग्रै पर केंद्रीय साहित्य अकादमी रौ युवा पुरस्कार।
आ किडीक बात ही
आओ अेकल करां
अबूलेंस
अेकलड़ो सुपनो
अणसुळझी समीकरण
अंतस रो ओळमो
बा स्यात मां ही
भडूकणो (गुब्बारो)
भाग रो सीर
बिना भासा रै राजस्थान
ढाणी
धरम री बहन
दुख क्यूं करां
गौर
हींडो मांडै कुण?
काळ
कमेड़ी
कविता तो ऊपजै
खेत हर्या कद होसी
लोटियो
मां री कूख
मंगती कोनी
मांयला ही जाणै
माटी
माटी म्हारी गुठळी कठै
पळींडो
पंछी
रूंख अर चिड़कली
तड़फता दोय जीव
थारी जुर्रत कोई
टावर