प्रेम पर सोरठा

प्रेम जूण जीवण रौ आधार

है। राजस्थानी प्रेमाख्यान अर पूरी साहित्यिक जातरा में इणरा फूठरा अर सिणगार्‌योड़ा दाखला आपां पढ़ां‌‌‌‌। अठै संकलित रचनावां प्रेम विसै रै ओळै-दोळै रचियोड़ी है‌।

सोरठा21

धन पारेवां प्रीति

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

सूतां सुपनै आई

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

कामण सयणां कीध

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

करी मन धीर करीर

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

तूं बीछड़ियौ त्यार

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

मन मिलियौ सयणांह

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

बहुत बुरी है बात

साह मोहनराज

निज दुख देखे नांह

साह मोहनराज

भूंडो अपणो भाग

साह मोहनराज

साजन गया सम्बाहि

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

साजनियां संसार

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

सयणे न लही सार

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

चित हित सूं कर चाव

साह मोहनराज

हेमंत मालती रा सोरठा

रामसिंघ सोलंकी

नयणे मिलसै नैण

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

दीह दुहेलौ जाइ

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

चिति मिलवा री चाह

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

देखि सुरंगी डाळ

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

अेक पखीणि अंग

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

तन धन जोवन ताकतां

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’