प्रेम पर ग़ज़ल

प्रेम जूण जीवण रौ आधार

है। राजस्थानी प्रेमाख्यान अर पूरी साहित्यिक जातरा में इणरा फूठरा अर सिणगार्‌योड़ा दाखला आपां पढ़ां‌‌‌‌। अठै संकलित रचनावां प्रेम विसै रै ओळै-दोळै रचियोड़ी है‌।

ग़ज़ल14

आज कबीरी चादर धर दे

राजूराम बिजारणियां

प्रीत रीत नै कण जाणी

राजूराम बिजारणियां

म्हाकै वा

देवकी दर्पण ‘रसराज’

बीं की मेरी है दोस्ती

कुंदन सिंह 'सजल'

लोग घणां ई घूमबा-फरबा जावै छै

कृष्णा कुमारी ‘कमसिन’

प्रेम रो नांव कान्हो है

राजूराम बिजारणियां

हूँ थारी याद लियां बैठ्यो हूँ

लक्ष्मीनारायण रंगा

आओ मीठी बात करां

सुमन बिस्सा

याद नित आयां सरै

किशोर कल्पनाकान्त

ऊ जद बी झाँकै आकाँ सूँ

पुरुषोत्तम 'यकीन'

खुसबू रळी मन-प्राण में

किशोर कल्पनाकान्त