प्रेम पर लोकगीत

प्रेम जूण जीवण रौ आधार

है। राजस्थानी प्रेमाख्यान अर पूरी साहित्यिक जातरा में इणरा फूठरा अर सिणगार्‌योड़ा दाखला आपां पढ़ां‌‌‌‌। अठै संकलित रचनावां प्रेम विसै रै ओळै-दोळै रचियोड़ी है‌।

लोकगीत61

जल्ला-सैण

लोक परंपरा

मनड़ो ले ग्यो

लोक परंपरा

सुंदर गौरी

लोक परंपरा

लखी बणजारा

लोक परंपरा

मेहंदी

लोक परंपरा

हळदी

लोक परंपरा

लूणागर

लोक परंपरा

चिरमी

लोक परंपरा

कलाळी

लोक परंपरा

कैर री हूंस

लोक परंपरा

मीठो बोल पपैया

लोक परंपरा

बुगलौ

लोक परंपरा

सावण री तीज

लोक परंपरा

केसर बन्ना

लोक परंपरा

हालरियौ

लोक परंपरा

बालो चाल्यो ए

लोक परंपरा

कीड़ी

लोक परंपरा

मेवाड़ी राणा

लोक परंपरा

डईयम डो

लोक परंपरा

राणो काछबो

लोक परंपरा

हींडो सावण रो

लोक परंपरा

जलालो-बिलालो

लोक परंपरा

माणीगर

लोक परंपरा

राम भजौ

लोक परंपरा

आंखड़ली फरूकै

लोक परंपरा

बोर री हूंस

लोक परंपरा

बाईसा लाडका घणा

लोक परंपरा

मूमल

लोक परंपरा

डोरो

लोक परंपरा

जीरो

लोक परंपरा

राधा भजन

लोक परंपरा

कुरजां

लोक परंपरा

लवार जीवड़ा

लोक परंपरा

काचर

लोक परंपरा

अरणी

लोक परंपरा

लहरियो

लोक परंपरा

झेडर

लोक परंपरा